नईदुनिया खास खबर

कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना के लॉकडाउन की व्यस्तता के चलते ग्रीष्म से पहले हैंडपंप का संधारण नहीं किया गया है। 179 गांवों के 3000 हैंडपंप फ्लोराइड प्रभावित है। जलापूर्ति दुरुस्त करने के लिए पीएचई विभाग ने 17 करोड़ की कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत निकटवर्ती फ्लोराइड रहित हैंडपंप से जल विस्तार कर प्रभावित जगह में जलापूर्ति की जानी है। पिछले दो साल से पीएचई विभाग के बजट में शामिल योजना को राशि स्वीकृति नहीं मिलने से फ्लोराइड की समस्या का दिन-ब-दिन विस्तार हो रहा है।

पेयजल संकट गहराने के साथ फ्लोराइड प्रभावित हैंडपंपों का तेजी से उपयोग होने लगा है। पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर ग्राम नकटीखार बस्ती में फ्लोराइड प्रभावित हैंडपंप में लगाया गया रिमूवल प्लांट डेड़ माह से खराब हो चुका है। लोगों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है। जिन हैंडपंपों को पीएचई विभाग ने फ्लोराइड प्रभावित के तौर पर चिन्हांकित किया है, उनका उपयोग करने के लिए ग्रामीण मजबूर हैं। प्रभावित हैंडपंप ग्रामीणों के लिए समस्या का सबब साबित होने लगी है। एक ओर जहां हैंडपंप फ्लोराइड प्रभावित हैं, वहीं दूसरी ओर जिन नल-जल योजना के तहत की जा रही जलापूर्ति के लिए भूमिगत जल स्त्रोत की कमी देखी जा रही है। स्त्रोत नहीं होने से 112 में से 24 नल-जल योजना ठप हो चुके हैं। पानी की समस्या लगातार विकराल होते जा रही है। फ्लोराइड ऐसी विकट समस्या है, जिससे अस्थि व दंतरोगों को बढ़ावा मिल रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित गांव पोड़ी-उपरोड़ा व पाली में है। बांगो डैम से प्रभावित गांवों को जलापूर्ति की योजना अब कहानी बन चुकी है। समस्याग्रस्त गांवों के लिए पीएच विभाग की ओर से पहल की गई है, किंतु बजट के अभाव में कार्य योजना को मूर्तरूप दिया जाना संभव नहीं हो रहा है। पेयजल की संकट दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है। फ्लोराइडयुक्त लाल पानी वाले हैंडपंप की तादाद भी बढ़ रही है। प्रभावित पंपों को ब्लॉक नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में इसका विपरीत परिणाम होगा। शहर से गांव तक कांक्रीटीकरण व सड़क निर्माण के कारण वर्षा जल संरक्षण की उपेक्षा हो रही है। इसका खामियाजा गर्मी के समय में भुगतना पड़ रहा है।

काम नहीं आया रिमूवल प्लांट

फ्लोराइड प्रभावित हैंडपंप में समस्या से निजात दिलाने के लिए विभाग ने पिछले तीन साल में 600 रिमूवल प्लांट लगाया है। सिस्टम को ऑपरेट करने की जानकारी स्थानीय ग्रामीणों को नहीं दी गई है। कई गांवों में प्लांट जाम हो चुके हैं। जाम होने से रिमूवल सिस्टम को ग्रामीणों ने हैंडपंप से अलग कर दिया है, इससे फ्लोराइड की समस्या यथावत बनी हुई है। गांव के मोहल्ले के अलावा स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों के हैंडपंप में लगे रिमूवल प्लांट नाकाम हो चुके हैं।

समूह नल-जल काम अधूरा

ग्रामीणों क्षेत्रों में खुले स्त्रोत के पानी को पिᆬल्टर प्लांट स्थापित कर आपूर्ति कराने की योजना पीएचई विभाग ने तैयार की थी। समूह नल-जल योजना के तहत कथरीमाल एनीकट से उरगा के आसपास के 25 गांवों को पानी देने की योजना थी। इसके लिए 33 करोड़ का आवंटन भी मिला था। समूह नल-जल संचालन नगरीय निकाय के आगे नहीं आने से यह योजना अब के्रडा को प्रदान कर दी गई है। दो साल बीत जाने के बाद भी काम 50 पᆬीसदी पूरा नहीं हुआ है।

कॉलरी क्षेत्र में संकट दयनीय

कॉलरी क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। भूमिगत जल स्त्रोत का प्रवाह खदान क्षेत्र में चले जाने से पानी की समस्या बनी हुई है। एसईसीएल प्रबंधन की ओर जलापूर्ति को लेकर उपेक्षा किए जाने का खामियाजा स्थानीय रहवासियों को भुगतना पड़ रह है। जलापूर्ति के लिए जहां अधिक गहराई तक बोर का खनन किया गया है, वहां फ्लोराइड की समस्या है। खदान के पानी को पिᆬल्टर कर आपूर्ति के लिए पीएचई ने योजना तैयार की है। राशि आवंटन के अभाव में काम शुरू नहीं हुआ है।

फ्लोराइड प्रभावित हैंडपंप संधारण का कार्य जारी है। रिमूवल प्लांट की सफाई के लिए विभागीय स्तर पर निविदा जारी की जाती है, जो अभी प्रक्रिया में है। फ्लोराइड प्रभावित गांवों में शुद्ध जल आपूर्ति कराने वृहद योजनाओं के तहत कार्य जारी है। गांवों में सिंगल फेस कनेक्शन से जलापूर्ति की जा रही है।

- एसके गौर, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना