कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। 16 जून से शुरू हो रही शैक्षणिक सत्र की शुरूआत को दो दिन बाकी हैं। संकुलों में पाठ्य पुस्तकें तो पहुंच चुकी हैं लेकिन डेढ़ लाख गणवेश का मिलना बाकी है। गणवेश के इंतजार में पुस्तकों का भी स्कूल में उठाव नहीं हो रहा। गणवेश आवंटन के अभाव में छात्र-छात्राओं को पुराने गणवेश से ही काम चलाना होगा। विभाग की ओर से स्पष्ट आदेश जारी नहीं होने से शाला प्रवेशोत्सव की तैयारी फीकी नजर आ रही है।

कोरोना काल की संक्रमण की काली छाया हटने के बाद नए शिक्षा सत्र की शुरूआत को अभिभावकों को को बेसब्री से इंतजार है। वजह यह है कि कक्षा पहली में दाखिला लेने के बाद पिछले दो सालों कई बच्चे ककहरा भी नहीं सीख पाए हैं। आनलाइन पढ़ाई के फेर में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा स्तर में काफी गिरावट आई है। व्यवस्था सुधरने की उम्मीद पर भी अब पानी फिरते नजर आ रहा। शासन की मंशा के अनुसार छात्र-छात्राओं को शाला प्रवेश के दौरान पुस्तक के साथ गणवेश दिया जाना है। 15 दिन पहले से ही पुस्तकें जिले सभी संकुलों में पहुंच चुकी हैं। यहां से अब तक सभी स्कूलों में वितरण कर लिया जाना था, लेकिन गणवेश और पुस्तक एक साथ देने का इंतजार किया जा रहा। सत्र शुरू होने से पहले पुस्तक और गणवेश देने का उद्देश्य यह होता है कि सभी स्कूलों में 16 जून से प्रवेश उत्सव के साथ पढ़ाई शुरू जाए, लेकिन अब यह संभव होते नजर नहीं आ रहा। एक संकुल के अंतर्गत चार से पांच स्कूल आती है। इनकी दूरी पांच से छह किलोमीटर है। समय पर पुस्तकें नहीं पहुंचने से वैकल्पिक तौर पर पुराने से काम चलाया जाता है। अब बच्चों का पुस्तक की तरह पुराने गणवेश पर भी काम चलाना पड़ेगा। स्कूलों तक पुस्तकें पहुंची है या नहीं इसकी जानकारी शिक्षा विभाग से अभी तक नहीं ली गई है। संकुुल से निश्शुल्क पाठ्य पुस्तकों को स्कूल तक पहुंचाने के मद स्पष्ट नहीं है। इस वजह से भी समय पर पुस्तकों का स्कूल में पहुंचाना संभव नहीं हो रहा।

दो वर्ष के स्टाक का नहीं लिया गया है जायजा

बीते शैक्षणिक सत्र में कोरोना संक्रमण की वजह से समय पर गणवेश का वितरण नहीं हुआ। स्कूलों कितनी मात्रा में गणवेश शेष है, इसकी जानकारी जिला शिक्षा विभाग की ओर से अब तक नहीं ली गई। दो साल पहले अतिशेष गणवेश को नाले बहते हुए पाया गया था। उल्लेखनीय है शिक्षा विभाग की ओर से छात्र और छात्राओं की गणवेश पहले से निर्धारित है। प्रत्येक विद्यार्थी को एक-एक जोड़ी गणवेश शिक्षा और आदिवासी विकास विभाग से प्रदान किया जाता। शिक्षा विभाग से गणवेश आना तय है लेकिन आदिवासी विकास विभाग अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे माना जा रहा है शिक्षा सत्र के शुरूआत में विद्यार्थियों को एक जोड़ी गणवेश में ही काम चलाना होगा।

राशि आवंटन के बाद भी नहीं रंगी स्कूलों की दीवारें

स्कूलों में प्रतिवर्ष मरम्मत राशि आवंटित की जाती है। जिसमें प्राथमिकता के साथ स्कूल की रंगाई का प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्र की बात तो दूर शहर के स्कूलों में भी इसकी शुरूआत नहीं की गई। बताना होगा मरम्मत के लिए प्रायमरी को 30, मिडिल को 35 और हाई हायर सेकेंडरी को 40 हजार रुपये प्रदान की जाती है। राशि आवंटन के बाद प्रतिवर्ष आडिट कराने का भी प्रावधान है। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग से नहीं लिए जाने के कारण स्कूल प्रबंधन इसे दूसरे मदे में खर्च कर देते हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से जर्जर स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

फैक्ट फाइल

1526- प्राथमिक शाला

513- मिडिल स्कूल

80- हजार प्राथमिक शाला के अध्ययनरत विद्यार्थी

70- हजार माध्यमिक शालाा के विद्यार्थी

वर्जन

नवीन शैक्षणणिक सत्र की तैयारी शुरू हो चुकी है। पाठ्यपुस्तक निगम की पुस्तकें सभी संकुलों में आ चुकी हैं। गणवेश का भी आवंटन शुरू हो चुका है। प्रवेशोत्सव में दौरान आने वाले बच्चों वितण किया जाएगा।

जीपी भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी

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Posted By: Nai Dunia News Network

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