कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भारत पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात वैज्ञानिक, प्रशासक एवं शिक्षाविद डा. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म दिन वर्चुअल प्लेटफार्म में मनाया गया। भारत में उन्हें एक वैज्ञानिक और इंजीनियर के रूप में याद किया जाता है। हर भारतीय केलिए गर्व क्षण था जब यूएनओ से डा. कलाम का जन्म दिन छात्र दिवस के रूप में घोषित किया गया। विज्ञान व तकनीक में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान उन्हें दिया गया। डा. कलाम विद्यार्थियों से बहुत प्रेम करते थे, जिनके लिए उन्होंने प्रेरक और प्रभावशााली मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।

डा. कलाम की जयंती पर विज्ञान और विश्व के लिए दिए गए उनके योगदान को याद करते हुए आनलाइन कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम की संयोजक व आयोजन प्रभारी प्रभा साव ने बताया कि यह कार्यक्रम दो कड़ी में वर्चुअल मंच के माध्यम से आयोजित की गई। पहली कड़ी में चित्रकला में 12, विज्ञान गणित माडल प्रदर्शन में दो, कोरोना के लक्षण एवं रोकथाम में छह प्रतिभागी सम्मिलित हुए। दूसरी कड़ी में भाषण के 15 को मिलाकर 35 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम में कुल 108 विद्यार्थियों व शिक्षकों ने मिलकर वर्चुअल प्लेटफार्म में जयंती मनाई। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। यह कार्यक्रम शासकीय हाई स्कूल स्याहीमुड़ी के सेवानिवृत्त शिक्षक हेमंत माहुलीकर के मुख्य आतिथ्य एवं प्राचार्य हाई स्कूल स्याहीमुड़ी डा. फरहाना अली के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि माहुलिकर ने डा. कलाम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से कहा कि एक छात्र के रूप में उनका जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा। अपने जीवन में उन्होंने कई तरह की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना किया, लेकिन पढ़ाई के प्रति अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण जीवन की हर की बाधा को पार मिसाइल मैन की पद्वी पाई और राष्ट्रपति के रूप में भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद आसीन हुए।

दंतेवाड़ा, बस्तर के प्रतिभागी रहे शामिल

इस राज्य स्तरीय आनलाइन कार्यक्रम में चार विधाओं उनकी संक्षिप्त जीवनी के साथ चित्रकला, भाषण जीवन वृत्त वर्णन, विज्ञान गणित माडल प्रदर्शन, कोरोना के लक्षण एवं रोकथाम को चित्र के माध्यम से समझाना शामिल रहा। यह सभी विधाएं डा. कलाम के प्रेरणादाई विचारों को विद्यार्थी अपने जीवन में आत्मसात कर सके, यही उद्देश्य लेकर यह कार्यक्रम रखा गया। इस कार्यक्रम में कोरबा के साथ छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, बस्तर, महासमुंद, बालोद समेत अन्य जिलों से प्रतिभागियों ने वर्चुअल मंच पर भाग लेकर अपनी प्रस्तुति दी।

सपने वह हैं जो हमें सोने नहीं देते

प्राचार्य डा फरहाना अली ने डा. कलाम के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि सपने वह नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं। सपने वह हैं जो हमें सोने नहीं देते, से विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि डा. कलाम का जीवन हमें इस बात की सीख देता है कि जीवन में चाहे कितनी ही चुनौतियां क्यों ना हों, शिक्षा का दामन थाम हम हर बाधा को पार कर बड़े से बड़ा लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को विश्व छात्र दिवस एवं विश्व प्रक्षालन दिवस से सीख लेते हुए अपने जीवन को बेहतर दिशा देने प्रेरित किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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