कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ग्राम कोरबी के तीन मोहल्ले में गोवंश की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीण अब भी गायों को लगाए गए टीके से मौत होने की जिद पर टिके हैं। पर टीके की बात को खारिज करते हुए प्रशासन ने कहा कि गांव की एक डबरी के पानी में कीटनाशक घुला पाया गया। दावा किया जा रहा कि इसी जहरीले पानी को पीने से मवेशियों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। ग्रामीणों ने कहा कि जिस जगह डबरी है, दूसरे मोहल्ले उससे दो-तीन किलोमीटर दूर हैं, जहां के मवेशी वहां से पानी भी नहीं पीते। मृत मछलियां मिलने के एक दिन पहले भी उसी डबरी से पानी नीने वाले कई मवेशी जीवित हैं। इस तरह नई बात कर लीपा-पोती कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा। इधर प्रशासन का कहना है कि सभी मोहल्ले 230 से 300 मीटर के दायरे में हैं और वहीं के मवेशियों की मौत हुई, जो उसी डबरी से पानी भी पीते थे।

ग्राम कोरबी के तीन मोहल्ले में 17 जुलाई को बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत का मामला सामने आया था। प्रभावित पशु पालकों का आरोप है कि उनके मवेशियों को वेडनरी विभाग की ओर से टीके लगने के बाद ही मौत हुई। ग्रामीण अब भी मवेशियों की मौत का कारण उस टीके को मान रहे हैं। कोरबी के इन तीन मोहल्लों में द्वारीपारा, खजूरपारा व कोरबीपारा शामिल हैं, जहां के मवेशी मरे। उस घटना के तीसरे दिन जांच में जुटी प्रशासनिक टीम ने पाया कि द्वारीपारा में रहने वाले पशु पालक देवनारायण की जमीन पर एक डबरी है, उसकी मछलियां व अन्य जीव मृत पाए गए। देवनारायण के सबसे ज्यादा 22 मवेशी भी मरे, जिसकी यह डबरी है। प्रशासन के अनुसार उस डबरी के पानी की जांच में कीटनाशक मिला पाया गया है। इसलिए टीके से मौत की बात शून्य है और अब इस बात की जांच कर रहे कि उस डबरी में किसी ने द्वेष पूर्वक कोई रसायन मिलाया या गलती से उसमें विषैला पदार्थ गिर गया था। विषैले पानी की वजह से प्रथम दृष्ट्या मौत का कारण माना जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण मंडल की लैब में भी डबरी के पानी का नमूना जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। पानी में कौन सा रसायन था, वह जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

17 के बयान, मौत से पहले जहरखुरानी के लक्षण

पोड़ी-उपरोड़ा के एसडीएम संजय कुमार का कहना है कि मृत्यु के पहले जो लक्षण थे, मवेशियों में, उनमें पेट फूलना, मुंह से लार व नाक से पानी बहना व कंपकंपाहट यह सब जहरखुरानी के ही लक्षण हैं। इनकी जानकारी 17 ग्रामीणों से पूछताछ में सामने आया, जिनके बयान भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुछ पशु पालक भी हैं और उनके मवेशी भी मरे हैं। सड़-गल गई है पर मृत पशुओं के शव अभी भी खेत में हैं। पांच वेडनरी चिकित्सकों ने उनका पोस्ट मार्टम भी किया है। जीवित और मृत दोनों तरह के बाडी पार्ट व रक्त के नमूने जांच कराने सैंपल लिया गया है, पानी का नमूना भी लिया गया है, जिसे रायपुर टीम लेकर जा चुकी है। लैब की जांच रिपोर्ट चार-पांच दिन में आ जाएगी। तब तक के लिए

पानी व पशुओं के सैंपल लेकर टीम रायपुर रवाना

जांच कार्रवाई में पशुपालकों, ग्रामीणों के अलावा सरपंच-सचिव के भी बयान लिखित में लिए गए हैं। सभी से पूछताछ और शव बरामद करने के बाद कुल 35 गायों की मौत होना पाया गया है, इससे अधिक नहीं। जिस हरे रंग की शीशी की तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई, वह टीका नहीं एंटीबायोटिक है। वह मवेशियों को लगाया ही नहीं गया है। गायों को लाल रंग का टीका लगाया गया था। रायपुर की टीम ने गुरूवार को उस डबरी के विषैले पानी का नमूना संग्रहित किया। इसके अलावा मवेशियों के शव और जीवित पशुओं से सैंपल एकत्र किया और जांच के लिए उसे लेकर रायपुर रवाना हो गई।

गाज को कारण बता पंचनामा की कोशिश

कोरबी के पशु पालक देवनारायण ने बताया कि मवेशियों की मौत के बाद वेडनरी विभाग का अटेंडेंट धरम कंवर गांव पहुंचा था। उसने मुआवजा के लिए गाज गिरने से मौत की बात लिखते हुए पंचनामा करने की कोशिश भी की थी। पशु पालकों ने गाज कहां गिरा, वहां कितने मवेशी थे, इस तरह की तकनीकी बातों पर गलत जानकारी लिखने से इंकार करते हुए अटेंडेंट को लौटा दिया था। देवनारायण का यह भी कहना है कि डबरी की मछलियां जिस दिन मृत मिली, उसके एक दिन पहले तक उसके अन्य मवेशियों ने उसी में पानी पीया था, पर उन्हें तो कुछ नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर तीन दिन पहले मृत मवेशियों की मौत कैसे हो गई। इससे प्रशासन का यह दावा गले नहीं उतर रहा।

पशु चिकित्सा विभाग भी जांच के दायरे में

धरम कंवर अटेंडेंट के पद पर कार्यरत है और विभाग के अनुसार वह भी टीका लगा सकता है। इसके बाद जांच के दायरे में पशु चिकित्सा विभाग भी है, जिसमें अगर आगे किसी भी प्रकार की अंदरूनी गड़बड़ी उजागर होती है, तो रिपोर्ट के साथ कलेक्टर से निलंबन, स्थानांतरण अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। एडीएम ने कहा कि गाज गिरने से मवेशियों की मौत होने की बात लिख पंचनामे की कोशिश के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अगर यह सच है, तो काफी गंभीर बात है। किसी ग्रामीण से लिखित शिकायत मिलती है, तो निश्चित ही उसे संज्ञान में लेकर जांच होगी। जो भी दोषी कर्मी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।

पुलिस ने किया एफआइआर से इंकार

प्रशासन की ओर से डबरी में कीटनाशक मिलाए जाने की शिकायत लेकर गांव के सरपंच-सचिव को एफआइआर दर्ज कराने पुलिस चौकी भेजा था। पर पुलिस ने यह कहते हुए सीधे एफआइआर करने से इंकार कर दिया कि जब तक प्रशासनिक जांच में सारे तथ्य स्पष्ट नहीं हो जाते, एफआइआर दर्ज नहीं की जाएगी। इस मामले में कोरबी चौकी प्रभारी बसंत साहू का कहना है कि सरपंच व सचिव लिखित शिकायत किए हैं, डबरी के पानी में किसी ने जहर मिला दिया है, इसकी जांच की जाए और पता लगाया जाए कि इसका दोषी कौन है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभागीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। अभी अज्ञात आरोपितों के खिलाफ एफआइआर नहीं हुआ है।

प्रशासन-वेडनरी विभाग के उलझाते दावे

0 घटना के दूसरे दिन जांच में कोरबी पहुंचे पशु विभाग ने कहा था कि गांव में मृत मवेशियों का एक भी शव नहीं मिला, न कोई बीमार पशु मिला, जिसकी सैंपलिंग की जा सके।

0 गुरूवार को प्रशासन ने कहा कि उन्हें गांव के खेतों में कई शव मिले और जीवित पशुओं से भी नमूने एकत्र किए गए, जो रायपुर की टीम जांच करने ले गई।

0 घटना के दूसरे दिन कहा गया कि चारागाह में जहरीली घास भी होती है, जिसका सैंपल लिया जा रहा।

0 तीसरे दिन उसी पशु पालक की डबरी के पानी में जहर मिला, जिसके मालिक के सबसे अधिक मवेशी मरे।

0 दूसरे दिन पोस्ट मार्टम के लिए वेडनरी विभाग के पास शव नहीं थे, एकत्र नमूने जांच के लिए रायपुर भेजने की बात कही जा रही थी।

0 गुरूवार को पता चला कि पांच चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया, विषैले पानी की जांच कोरबा में ही करा ली गई।

0 घटना के दूसरे दिन गलघोंटू व एकटंगिया का टीका लगाने की बात तो बताई पर यह नहीं बताया गया कि जिस शीशी की तस्वीर सामने आई थी, वह एंटीबायोटिक की थी, इन बीमारियों की नहीं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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