कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में संचालित सैकड़ों आंगनबाड़ी केंद्र मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे। केंद्रों की बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले में संचालित 2277 में 1339 आंगनबाड़ी केंद्र में पेयजल व शौचालय की सुविधा नहीं है। इनमें 448 केंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहे। एक ओर भवन किराया के नाम पर राशि का बंदरबाट हो रहा है, वहीं केंद्रों में नन्हे बच्चों की शिक्षा व सुपोषण की कवायद पᆬेल नजर आ रही है।

आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन विभगीय अपᆬसरों व कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बन कर रह गया है। विभाग से जुड़ी समस्याओं से सरोकार नहीं होने से केंद्र से संचालित योजनाओं का सही लाभ आम हितग्राहियों को नहीं मिल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता के लिहाज बनाए गए शौचालय कमीशन की भेंट पहले ही चढ़ चुके हैं। रही बात पेयजल की तो 1339 ऐसे केंद्र हैं जहां कार्यरत सहायिकाओं को दूसरी जगह से पानी लाना पड़ता है। पानी की समस्या के चलते गर्म भोजन व पोषण पर विपरीत असर पड़ रहा है। भोजन पकाने की समस्या को देखते हुए सप्ताह भर जितना चावल एक बच्चे के पीछे लगता है, उससे कम तौल कर अभिभावकों को दे दिया जाता है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को दिया जाने वाला पोषण आहार भी शामिल है, जो प्रत्येक आंगनबाड़ी में पकाया जाना है। नियम के उलट गर्भवती महिलाओं को भी सप्ताह में एक से डेढ़ किलो चावल दे दिया जाता है। इससे पकाने के लिए ईंधन की समस्या से भी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को मुक्ति मिल जाती है, जबकि रिकॉर्ड में पोषण आहार पूर्ण प्रदान किया जाना दर्शाया जाता है। शहरी क्षेत्र के तुलसीनगर, ढोढ़ीपारा, मुड़ापार, कोसाबाड़ी आदि केंद्रों में इस तरह की अव्यवस्था की स्थिति देखी जा रही है। जिन केंद्रों का संचालन किराए के भवनों में किया जा रहा है, वहां भी शौचालय की सुविधा नहीं है। परियोजना अधिकारियों के लिए किराए से संचालित भवन कमाई का जरिया बना हुआ है। अधिकारी नहीं चाहते कि सभी आंगनबाड़ी केंद्र शासकीय भवन में चले। भवन निर्माण के प्राक्कलन में पेयजल व शौचालय की सुविधा शामिल होने के बाद भी केंद्र में सुविधा की कमी विडंबना बनी हुई है।

-यहां के बोरवेल वर्षों से सूखे

कोरोना वायरस के कारण वर्तमान में आंगनबाड़ी बंद है, पर गर्मी में बच्चों की उपस्थिति भी कम हो जाती है। पेयजल की समस्या को देखते हुए अभिभावक भी बच्चों को केंद्र भेजने में रुचि नहीं लेते। नकटीखार, करमंदी, पड़निया आदि ऐसे केंद्र हैं जहां के परिसर बोरवेल वर्षों से सूख चुके हैं। सुधार नहीं कराने के कारण समस्या का निराकरण नहीं हुआ है। बच्चों की अनुपस्थिति के बाद भी केंद्रों में पर्याप्त उपस्थिति दर्शाकर गर्म भोजन के नाम पर चावल आहरण किया जाता है। केंद्र पहुंचने वाले बच्चों के लिए पर्याप्त पेयजल की सुविधा नहीं होने से संचालन समय तक उन्हें प्यासा रहना पड़ता है।

-पᆬैक्ट पᆬाइल

- संचालित आंगनबाड़ी- 2277

- शौचालय व पेयजल की कमी- 1339

- अहाताविहीन- 1578

- किराए से संचालित- 448

-विद्युतविहीन- 1613

Posted By: Nai Dunia News Network