कोरबा (नईुदनिया प्रतिनिधि)। नेशनल हाइवे के उरगा फाटक में तैयार हो रहा 23 करोड़ के ओवर ब्रिज का काम छह माह से बंद है। ब्रिज का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। रेलवे मार्ग के हाईटेंशन के उपर ब्रिज निर्माण को अंतिम रूप देने के लिए बीम लगाना शेष है। इसके सेतु निगम रेलवे से स्वीकृति मांगी है, जो अभी तक नहीं मिली है। ओवर ब्रिज का काम पूरा नहीं होने से हर आधे घंटे के भीतर फाटक बंद से नेशनल हाइवें में वाहनों की कतार लग जाती हैं। जिससे आवागमन बाधित रहता हैं।

भारी वाहनों के आवागमन रूट तैयार करते हुए शासन नेउरगा हाटी मार्ग को नेशनल हाईवे में शामिल तो कर दी लेकिन सुविधा नहीं दिए जाने से स्थानीय लोगों के लिए यह आफत ही साबित हो रहा है। भैसमा से उरगा के बीच सामान्य आवागन बदहाल हो चुकी है। भारी वाहनों के कारण धूल से मार्ग में लोगों का चलना मुश्किल है। ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य पूर्ण होने की निर्धारित समय सीमा से दो साल पीछे चल रहा है। अब जबकि निर्माण अंतिम चरण में है तब रेलवे के अनुमोदन के अभाव में काम रूक गया है।ब्रिज के दोनो छोर का काम लगभग पूरा हो चुका है। पटरी मार्ग में लगे हाईटेंशन तार के उपर ब्रिज के दोनो छोर को जोड़ना है। इसके लिए कुल 12 बीम का स्लैब लगना है। तैयार हो चुके बीम को लगाने के लिए माध्यम की जानकारी मांगी है। सेतु निगम ने रेलवे से पूछा है कि बीम लगाते समय रेल आवागमन को बंद रखना उचित रहेगा अथवा क्रेन से बीम चढ़ाया जाए। जिसका जवाब छह माह बीतने के बाद भी रेलवे से नहीं आया है। जब तक रेलवे से अनुमोदन नहीं मिल जाती तब तक काम को आगे बढ़ाना संभव नही। उल्लेखनीय है शहर में तैयार हो चुके ओवर ब्रिज के बाद यह जिले का दूसरा ओवर ब्रिज है।

20 ग्राम पंचायत के लोगों को हो रही परेशानी

उरगा भैसमा तुमान सहित 20 से भी अधिक ग्राम पंचायत कोरबा चांपा मुख्य मार्ग मे जुड़ने के लिए इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। उरगा से भैसमा की दूरी सात किमी है, लेकिन मार्ग में अक्सर फाटक बंद रहने से इतनी कम दूरी को तय करने के लिए घंटे भर का लग जाता है। उरगा फाटक के आगे विपणन विभाग का गोदाम है। शहर के गोदाम में चावल से भर जाने पर उरगा भेजा जाता है लेकिन मार्ग में ओवर ब्रिज की सुविधा नही होने से मिलर्स यहां ट्रक भेजने में पीछे रहते हैं।

एंबुलेंस वाहन खड़े रहते हैं कतार में

उरगा रेलवे फाटक में लगे वाहनों की कतार में आए दिन एंबुलेंस को भी देखा जा सकता है। प्रसव अथवा सड़क दुर्घटना के मरीज को अस्पताल पहुंचाना हो तो यह मार्ग मुश्किल भरा है। आपातकालीन दशा में भैसमा तिलकेजा व आसपास के ग्राम पंचायत के रहवासियों को नकटीखार मार्ग से होते हुए शहर आना पड़ता है। ओवर ब्रिज तैयार नहीं होने से प्रसूति, बीमार ही नहीं बल्कि प्रतिदिन आवागमन करने वाले छात्र-छात्राओं को बंद फाटक पार कर स्कूल जाना पड़ता है।

भू- अधिग्रहण की समस्या

ओवर ब्रिज निर्माण में केवल रेल्वे विभाग ही नहीं बल्कि भू-अधिग्रहण का भी रोड़ा है। रेलवे पटरी के दोनो छोर में ओवर ब्रिज को पूर्ण आकार देने के लिए निजी भूमि की भी जरूरत है। लगभी छह हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया मुआवजे पर रूक गई है। जमीन के बदल तय की गई सरकारी मुआवजा से ग्रामीण संतुष्ट नहीं है। अधिग्रहित की जाने वाली जमीन में हर साल खेती होती है। अधिग्रहण की प्रकिया पूरी नहीं होने से भी निर्माण कार्य बाधित है।

ओवर ब्रिज का काम 70 फीसदी पूर्ण हो चुका है। अंतिम चरण के कार्यो में बीम लगाना है, जिसे तैयार कर ली गई है। लांचिंग स्कीम का रेलवे से अनुमोदन का इंतजार है। अनुमोदन मिलते ही काम आगे बढ़ाया जाएगा।

एके जैन, कार्यपालन अभियंता, सेतु निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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