कोरिया। School Education: लॉकडाउन के दौर ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। लोगों ने इस समय से सीख लेकर अपनी जिंदगी जीने का नजरिया बदला है। इस दौर में लंबे समय तक शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने के बाद वैकल्पिक शिक्षा की शुरूआत हुई। ऑनलाइन के साथ ही तुंहर पढ़ई तुंहर द्वार और मोहल्ला क्लास की संकल्पना भी विकसित हुई। मोहल्ला क्लास के तहत शिक्षक गांव-गांव जाकर बच्चों को मोहल्लों बैठाकर उनकी पढ़ाई करा रहे हैं। कई जुझारू शिक्षक इस अनुप्रयोग में नए प्रतिमान भी स्थापित कर रहे हैं। इन्हीं में से एक शिक्षक हैं कोरिया जिले के रूद्र प्रताप सिंह, जो इन दिनों अपनी बाइक पर एक छाता लगाकर और ग्रीन बोर्ड को बांधकर गांव- गांव जाते हैं। यहां यह बच्चों को एकत्र कर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए उन्हें पढ़ाई कराते हैं।

इन दिनों यह छतरी वाले शिक्षक छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर ग्राम सकड़ा में प्राथमिक शाला सकड़ा के शिक्षक रुद्र प्रताप सिंह राणा अपनी मोटरसाइकिल में छतरी, एक सूटकेस में पुस्तकालय, माईक, घण्टी, ब्लैक बोर्ड लेकर बच्चों को पढ़ाने मोहल्ला क्लास में पहुचते हैं और प्राथमिक शाला सकड़ा के आसपास गुरवापारा, पटेल पारा, स्कूल पारा, बिही पारा, मुहारी पारा में मोहल्ला क्लास आयोजित कर बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। यहां हम आपको बता दें कि शिक्षक रुद्र प्रताप सिंह राणा रोजाना पेंड्रा मरवाही जिले के लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम प्रारासी से आना जाना करते हैं। छतरी वाले बाबू का यह नाम पाना आसान नही था चुकी वो एक किसान भी है और बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने अपने खर्चे से बच्चों को आधुनिक पढ़ाई से जोड़ने का यह प्रयास काबिले तारीफ है।

छतरी वाले बाबू रुद्र प्रताप सिंह राणा शिक्षक जिस भी मोहल्लों में मोहल्ला क्लास लेने जाते हैं, तो सर्वप्रथम मोहल्ला पहुंच कर अपनी मोटरसाइकिल को स्टैंड में खड़ा कर घण्टी बजाते है जिसे सुन कर मोहल्ला के सभी बच्चे कहीं भी रहे दौड़ते भागते अपने- अपने घरों के बाहर झज्जे में चटाई, स्कूल बैग लेकर मोहल्ला क्लास में शामिल होते है और फिर मोहल्ला क्लास शुरू करने से पहले अपनी- अपनी जगहों में खड़े हो कर राष्ट गान गया जाता है जिसके बाद पढ़ाई प्रारम्भ होती है। यह परिक्रिया रौजाना सभी मोहल्ला क्लास में अपनाई जाती है। छतरी वाले बाबू रुद्र प्रताप सिंह राणा गीतों के माध्यम से अपनी सूटकेस में रखे पुस्तको से बेहतर शिक्षा मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं।

छतरी वाले बाबू रुद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि जिस दिन से मोहल्ला क्लास शुरू हुई है उस दिन से बच्चे भी बड़ी उत्सुकता से इस क्लास में शामिल हो रहे हैं। सही मायने में यह मोहल्ला क्लास बच्चों को कोरोना से बचा रही है और कोरोनकाल में शिक्षा के नजदीक ला रही है। मेरा मोहल्ला क्लास गांव के लम्बी गलियों के बीचों बीच संचालित होता है जो चारों ओर से खुला है। बारिश हो या आंधी, बच्चे अपने घरों के बहार झज्जे के नीचे बैठ कर पढ़ते हैं और मैं छाते के नीचे खड़े हो कर पढ़ाता हूं। यह छतरी मुझे धूप - बारिश से बचाती है और ग्रामीणों सहित बच्चों को मेरा यह अनोखा तरीका बेहद पसंद आता हैं।

Posted By: Himanshu Sharma

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