महासमुंद। शहर सहित जिले से बड़ी संख्या में रोजगार के लिए राजधानी जाने वाले लोगों का रोजगार कोरोना ने छीन लिया है। हालांकि अब स्थिति सुधर चुकी है लेकिन लोकल ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं होने और बसों का सफर महंगा होने की वजह से रोजगार की आस में लगे लोगों ने स्थानीय स्तर पर ही काम शुरू कर दिया है।

राजधानी रोजगार के लिए जाने वालों में सर्वाधिक संख्या मुख्यालय के लोगों की रही है। इसके अलावा कोमाखान, भीमखोज और बागबाहरा से भी बड़ी संख्या में युवा ट्रेन के माध्यम से प्रतिदिन रोजगार के लिए राजधानी का सफर तय करते थे जो लाकडाउन के बाद से बेरोजगार हो गए हैं।

संक्रमण पर नियंत्रण होने के बाद फिर से रोजगार के लिए राजधानी जाने की आस लगाए थे। लेकिन स्थिति नियंत्रण के बाद ट्रेनों का परिचालन तो शुरू हो गया है लेकिन मासिक पास की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। इसकी वजह से ट्रेन का सफर महंगा है और अब बस का सफर भी महंगा हो गया है। जिसके चलते ऐसे लोगों ने स्थानीय स्तर पर ही काम शुरू कर दिया है।

बस में 70 तो ट्रेन में 50 रुपये किराया

ट्रेन के साथ अब बस का सफर भी महंगा हो चुका है। महासमुंद से रायपुर का बस किराया 50 से सीधे 70 रुपये हो चुका है जबकि ट्रेन का किराया 50 रुपये हो चुका है। इसकी वजह ट्रेन में आरक्षण के आधार पर टिकट दिए जा रहे हैं और ना ही लोकल ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ है और दैनिक यात्रियों को दी जाने वाली मासिक पास की सुविधा, इसलिए राजधानी का सफर पहले की अपेक्षा महंगा हो चुका है।

खुद की दुकान चला रहा

यशवंत ने बताया कि वे रायपुर में मेडिकल क्षेत्र में काम करते थे। लॉकडाउन में काम बंद होने के बाद से वे खुद मेडिकल स्टोर्स खोलकर परिवार चला रहे हैं।

लिकेश यादव ने बताया कि वे भी रायपुर पंडरी स्थित कपड़ा मार्केट में काम कर रहे थे। लाकडाउन के बाद छह माह इंतजार के बाद जब व्यवस्था नहीं सुधरी तो स्थानीय स्तर पर जो काम मिल रहा उसे कर रहे हैं।

प्लांट में मिला रोजगार

शिव साहू ने बताया कि एक साल तक प्रतीक्षा के बाद जब स्थिति नहीं सुधरी तो यहां प्लांट में रोजगार की तलाश किया तब से यही कार्य कर रहे हैं। रायपुर में काम है पर सफर के लिए साधन की स्थाई व्यवस्था नहीं है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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