महासमुंद। बुद्ध पूर्णिमा के पावन मौके पर अंबेडकर प्रतिमा के लिए चबूतरा निर्माण एवं सौंदर्यीकरण का संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर एवं नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर द्वारा पार्षदों की मौजूदगी में लोकार्पण किया गया।

अध्यक्ष निधि साढ़े तीन लाख रुपये से अंबेडकर चौक स्थित डा भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के लिए चबूतरा एवं सौंदर्यीकरण किया गया। उक्त लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर थे। अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर ने की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर लोक निर्माण विभाग के सभापति रिंकू तारेन्द्र चंद्राकर, संदीप घोष, देवीचंद राठी, हफी कुर्रेशी, राहुल चंद्राकर, भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष शंकर नंदेश्वर, पीजी. बंसोड़, राजू बाघमारे मौजूद रहे।

अतिथियों ने डा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण व श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया। बाद बौद्ध महासभा के द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें समाजजनों ने नगर पालिका अध्यक्ष सहित पार्षदों का पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। इस मौके पर पालिका अध्यक्ष चंद्राकर ने कहा संविधान निर्माता अंबेडकर की प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर रखना पालिका की नैतिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि दाऊलाल चंद्राकर, भाऊराम साहू, डा एनके मंडपे, ज्योति मंडपे, महेन्द्र सिक्का, सुरेखा कंवर, लक्ष्‌मी साहू, सुनीता साहू, गुलाब राजपुरोहित, बी एल बेलेकर, व्ही के नागदेवे, रीना वासनिक, बी आर घोडेसवार, संजय रामटेक, वर्षा मोटघारे, सावित्री देवी उके, शालिनी गायगौरे, राजेश रामचंद भालेराव, रतन कामडे, राजेश गजभिए, संध्या गजभिए, सीएमओ आशीष तिवारी, विक्की महानंद, गोपाल चंद्राकर, सहित समाज प्रमुख गण उपस्थित थे।

सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले भगवान बुद्ध के जन्मोत्सव पर बुद्ध पूर्णिमा मनाई

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा के दिन दान, पुण्य और धर्म-कर्म के अनेक कार्य किए जाते हैं। यह स्नान लाभ की दृष्टि से अंतिम पर्व है। इस दिन मिष्ठान, सत्तू, जलपात्र, वस्त्र दान करने तथा पितरों का तर्पण करने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस दिन सत्य विनायक पूर्णिमा भी मनायी जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के बचपन के दरिद्र मित्र ब्राह्मण सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उनको सत्यविनायक व्रत का विधान बताया। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता जाती रही तथा वह सर्वसुख सम्पन्ना और ऐश्वर्यशाली हो गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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