राकेश शर्मा, नुआपड़ा (नईदुनिया)। देश को आजादी मिले 73 वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन कई गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। शासकीय सेवाएं अब भी अव्यवस्था की चारपाई पर बीमार पड़ी है। केंद्र व राज्य सरकार नित नई योजनाएं लागू कर रही है पर दुर्गम अंचल में बसे लोगों तक इसका कोई लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। शनिवार को ओडिशा के नुआपड़ा जिले के एक गांव में रास्ता नहीं होने से गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी।

प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती को खाट पर उठाए परिजन एंबुलेंस तक पहुंचाने गांव से चार किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता पैदल तय करने की जद्दोजहद को मजबूर हुए। घटना जिलामुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर खरियार ब्लॉक अधीन आनेवाले रानीमुंडा ग्रामपंचायत के समाड़पदर गांव की है।

घने जंगल और पहाड़ो से घिरे समाड़पदर गांव निवासी खगेश्वर माझी की पत्नी रेवती माझी को प्रसव पीड़ा होने पर उसे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को फोन किया गया। किन्तु गांव तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने की वजह से एम्बुलेंस नही पहुंच सकी। कोई और व्यवस्था नहीं होने पर दर्द से तड़प रही गर्भवती को स्ट्रेचर में कंधों पर उठाकर परिजन चार किलोमीटर का पथरीला रास्ता तय कर एम्बुलेंस तक पहुंचे। जिसके बाद महिला को 14 किलोमीटर दूर खरियार उपखंड स्वास्थ्य केंद्र लेजाया गया जहां उसने एक कन्या को जन्म दिया।

पहले भी इस गांव में हो चुकी है ऐसी घटना

समाड़पदर गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंचने की वजह से गर्भवती महिलाओं को स्ट्रेचर या खाट पर रखकर कठिन पथरीले रास्ता तय कर एम्बुलेंस तक पहुंचाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहली भी कई दफा ऐसी घटना घट चुकी है। बीते वर्ष दो जुलाई की सुबह प्रमिला माझी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने महिला का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सरकार द्वारा नियोजित एंबुलेंस को फोन किया था। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र और आशाकर्मियों को भी अवगत कराया था। किंतु दुर्भाग्य से प्रसव पीड़ा से व्यतीत महिला को एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाई।

जिसके बाद मजबूरन गर्भवती महिला के परिजन उसे एक चारपायी(खाट)में रखकर स्वास्थ केंद्र के लिए रवाना हो गए थे। चार किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद रास्ते में ही महिला ने शिशु कन्या को जन्म दे दिया था। इसके बाद परिजन बगैर मेडिकल जांच के जच्चा - बच्चा को वापस अपने घर ले गए ।हालांकि यह खबर फैलने के बाद स्वास्थ विभाग हरकत में आया था और जच्चा बच्चा की जांच के लिए एक एक मेडिकल टीम गांव पहुंची थी।

एक छड़ी के सहारे पैदल पहाड़ी रास्ता तय कर कलेक्टर पहुंची थी यह गांव , मिला था पुरस्कार

ज्ञात हो कि दिसंबर 2017 में तत्कालीन कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी डॉ. पोमा टुडू ने एक छड़ी के सहारे पैदल चार किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता तय घने जंगल और पहाड़ों से घिरे समाड़पदर गांव का दौरा किया था। कलेक्टर ने आश्वासन दिया था कि जिले के अंतिम छोर पर बसे इस गांव में स्वास्थ्य , शिक्षा , पेयजल आपूर्ति सहित आवागमन के लिए समुचित सड़क मार्ग का निर्माण अतिशिघ्र करवाया जाएगा। मूलभूत सुविधाओं से वंचित इस गांव में शासकीय सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा से तत्कालीन कलेक्टर के इस दौरे की पूरे देश में खूब प्रशंसा हुई थी। उनके इस प्रयास के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें अवार्ड देकर सम्मानित भी किया था।

पोमा टुडू के दौरे के बाद इस गांव के तेज़ विकास की उम्मीद जगी थी पर कोई खास कार्य नही हो पाया है। गौरतलब है कि जुलाई 2013 से अप्रैल 2015 तक नुआपड़ा कलेक्टर रहे आईएएस अधिकारी जय कुमार वी भी अपने कार्यकाल के दौरान इस गांव पहुंचे थे। उन्होंने गांव की उन्नति के लिए पांच प्रोजेक्ट्स को मंजूरी भी दी थी जिनमें विद्युत आपूर्ति , स्कूल भवन का जीर्णोद्धार ,आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण , पेयजल सप्लाई व सड़क निर्माण शामिल था। किन्तु आज भी यह गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

फ़ोटो - स्ट्रेचर पर गर्भवती महिला को चार किलोमीटर दूर खड़ी एम्बुलेंस तक लेजाते हुए परिजन व अन्य।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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