महासमुंद। देश को पहला सहकारी किसान राइस मिल महासमुंद ने दिया था।

सहकारी, समाजवादी एवं किसान आंदोलन के प्रणेता भूषणलाल 1948 में जिला रायपुर के 26 किसानों को संगठित कर एक लाख 51 हजार रुपये एकत्रित कर, कंपनी बनाकर महासमुंद में किसान राइस मिल की नींव डाली। उन्होंने सहकार से उद्धार पर काम किया। आज महिला समूहों का गठन इसी के उदाहरण हैं।

किसान राइस मिल के सदस्यों में छग शासन के पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के दादा राधेश्याम चंद्राकर कुरुद, शेरसिंग बेमचा, भेखलाल मुड़मार, माखनलाल कोना, बेनीराम, छंगू लाल बिरकोनी, भूषणलाल, गोरेलाल सोरंसिंघी, तुकाराम बकमा, और बृजभूषण लाल लभरा, जगनाथी, शारदा प्रसाद केशवराम, गणेशराम, किरीत राम, लोकनाथ, उदयराम, रामधीन महासमुंद, उदयराम खुसरूपाली, आनंदराम खैरा, बाबूलाल बावनकेरा एवं भूषणलाल चंद्रनाह महासमुंद शामिल रहे।

बता दें कि भूषणलाल का जन्म 13 मार्च 1919 में ग्राम फरफौद आरंग जिला रायपुर में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा ग्राम फरफौद, माध्यमिक शिक्षा महासमुंद से प्राप्त कर इंटर मीडिएट की शिक्षा की शिक्षा मारिस कालेज नागपुर में की। एमए और एलएलबी की शिक्षा काशी विश्वविद्यालय बनारस में ली।

सन 1949 में स्वतंत्रता संग्राम के नेता त्यागमुर्ति ठा. प्यारेलाल सिंह एवं राजचरण मिश्रा किसानों के संगठन से प्रभावित होकर महासमुंद आए और आजादी के आंदोलन में सहकारिता आंदोलन से राइस मिल को जोड़ने प्रेरित किया। उनके प्रेरणा से महासमुंद किसान सहकारी राइस मिल मर्यादित महासमुंद का पंजीयन रजिस्टार को-आपरेटिव सोसाइटी सीपी एंड बरार नागपुर के द्वारा किया गया।

यह देश का प्रथम सहकारी राइस मिल है। भूषणलाल के द्वारा अपने वरिष्ठ सदस्य मन्नूलाल चंद्राकर को अध्यक्ष मनोनीत कर उपाध्यक्ष पद से संचालित करते रहे। आजादी के बाद सीपी बरार राज्य का पुर्नगठन किया गया और छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश में सम्मिलित किया गया।

कालांतर में महासमुंद किसान सहकारी राइस मिल से प्रेरित होकर मध्य प्रदेश शासन के द्वारा छत्तीसगढ़ के सभी विकासखंडों में सहकारी चावल मिल एवं विपणन समितियों का गठन किया गया। जिससे महासमुंद किसान सहकारी राइस मिल एवं विपणन समिति मर्या. महासमुंद हो गया। सहकारी आंदोलन का यह प्रथम राइस मिल आज बंद होने के हालात में है।

सन् 1966 के पूर्व जिला रायपुर, दुर्ग के अंतर्गत धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार, कवर्धा तहसीलों में चंद्रनाहू कुर्मी समाज में सामाजिक राजा हुआ करते थे, निर्वाचित संगठन नहीं था। 1966 में चंद्रनाहू कुर्मी समाज का धमतरीराज, महासमुंदराज, दुर्गराज, कवर्धाराज, एवं लवनराज का गठन कर छत्तीसगढ़ स्तर पर केंद्रीय कमेटी गठित किया गया। जिसका प्रथम केंद्रीय अध्यक्ष भूषणलाल को निर्वाचित किया गया।

उनके द्वारा सन 1969 में डंगनिया रायपुर में 20 हजार में भूमि खरीदी कर चंद्राकर छात्रावास की नींव डाला गया। 24 फरवरी 1980 में उनका निधन हो गया। लेकिन उनकी प्रेरणा से आज भी सहकारी एवं समाजवादी आंदोलन जारी है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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