महासमुंद। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को बजट पेश किया। बजट को लेकर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। किसी ने बजट को सराहा तो किसी ने कहा निराशाजनक बताया है।

संसदीय सचिव व विधायक विनोद चंद्राकर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रस्तुत बजट पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में छत्तीसगढ़ के लोगों की भावनाओं का समावेश है। उन्होंने बजट को सर्वहारा वर्ग का ध्यान रखते हुए छत्तीसगढ़ के विकास को नया आयाम देने वाला बताया।

संसदीय सचिव व विधायक चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने बुधवार को वर्ष 2022-23 के लिए विधानसभा में बजट पेश किया। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण और लाकडाउन से जूझ रहे प्रदेश के हर वर्ग के लोगों को बजट में राहत दी गई है। मुख्यमंत्री ने राज्य के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की घोषणा की।

इसके लिए कर्मचारी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। वहीं आमजन को राहत देते हुए किसी भी नए टैक्स को नहीं लाया गया है। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत अब सात हजार रूपये सालाना दिए जाएंगे। मुुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत अब प्रदेश के सभी नगरपालिका और नगरपंचायतों में मोबाइल एंबुलेंस और दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य के युवाशक्ति को संगठित कर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाने के लिए राजीव युवा मितान क्लब के गठन के लिए 75 करोड़ का प्रविधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 11 हजार 664 एवं नगरीय क्षेत्रों में एक हजार 605 क्लबों का गठन किया जाएगा।

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हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया बजट

होली से पूर्व भूपेश सरकार ने जीवन में खुशियों का गुलाल घोला : जफर उल्ला

छत्तीसगढ़ के लिए बेहद महत्वपूर्ण एव ऐतिहासिक दिन रहा जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोबर से बने सूटकेस में बजट पेश किया।

महासमुंद लोक सभा कांग्रेस आइटी सेल के अध्यक्ष जफर उल्ला ने बताया कि यह बजट पूरी तरह हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिससे हर वर्ग को का लाभ मिलेगा। गरीब मजदूर किसानों के बाद पुरानी पेंशन को बहाल करना कर्मचारी हित में मील का पत्थर साबित होगा। फर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने होली से पूर्व जनता के जीवन मे खुशियों का रंग भरने का काम किया है।

राज्य का बजट बेहद निराशाजनक : भूपेंद्र चंद्राकर

आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर ने राज्य के पेश हुए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अब तक का सबसे निराशाजनक बजट है। बजट में बेरोजगारों को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता देने के लिए सरकार कोई पहल नहीं की, युवा मितान क्लब के नाम पर सिर्फ झुनझुना थमाया है। रोजगार देने प्रयास नहीं दिखता। सरकार में लाखों पद रिक्त है इसके बाद भी इन नए पदों में भर्ती के लिए कुछ नहीं किया गया। सरकार मुफ्त में फार्म भरने की बात तो कह रही है पर वैकेंसी नहीं निकाल रही है।

पुराने स्कूलों में पोताई कर आत्मानंद स्कूल खोले जा रहे हैं लेकिन वहां शिक्षक तक नहीं हैं, पुराने स्कूलों को सरकार ने बेपरवाह छोड़ दिया है। महिलाओं के हित में कोई अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया। अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण करने की दिशा में कोई पहल सरकार ने नहीं दिखाई। आज हर वर्ग के कर्मचारी आंदोलन कर रहे है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, पुलिस परिवार, विद्या मितान, आइटीआइ मेहमान प्रवक्ता, सचिव संघ, प्रेरक, ग्रंथपाल, शिक्षक एलबी संवर्ग, दिवंगत पंचायत शिक्षकों की अनुकंपा नियुक्ति, व्यावसायिक कंप्यूटर प्रशिक्षकों और आंशिक सफाई कर्मियों की मांगों पर सरकार ने कोई विचार नहीं किया।

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बजट से हर चेहरे पर मुस्कान : डा. रश्मि

जिला कांग्रेस कमेटी की जिलाध्यक्ष डा. रश्मि चंद्राकर ने बजट पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा की 2022-23 बजट आमजनों को ध्यान मे रख कर लाया गया है जिससे आज हर वर्ग इस बजट से लाभान्वित होगा। किसान, जवान, युवाओं के साथ इस बजट में कर्मचारियों के हित वाले निर्णय लिए गए हैं, जिससे आज कर्मचारियों के परिवारों के चेहरे पर खुशियां बिखेरे हुए है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को देखते हुए इस बजट में ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूरों को लाभ पहुंचाने का काम किया है। सर्वहारा वर्ग को लाभ देने वाला बजट रहा।

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लोक लुभावन घोषणाओं का पुलिंदा है बजट : रूपकुमारी

भारतीय जनता पार्टी की जिला अध्यक्ष व पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार का चौथा बजट लोक-लुभावन घोषणाओं का पुलिंदा है, जिसमें प्रदेश की जनता को राहत देकर विकास की ठोस पहल की इच्छाशक्ति का नितांत अभाव है। चौधरी ने कहा कि पुरानी और विफल हो चलीं योजनाओं में मामूली हेरफेर करके प्रदेश को चकमा देने की कोशिश की गई है।

यह बजट 'लोक-बजट' कम, 'फेक-बजट' ज्यादा है। चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रस्तावित बजट में आदिवासी क्षेत्रों में पुजारियों, बैगा-गुनिया और मांझी के लिए बेहद कम राशि की घोषणा करके आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे मतांतरण के कुचक्र और आदिवासियों के धर्मस्थलों व मूर्तियों के लगातार हुए और हो रहे विध्वंस से प्रदेश का ध्यान भटकाने की कोशिश की है।

चौधरी ने कहा कि आदिवासियों के सर्वांगीण विकास, सम्मानजनक जीवन-स्तर और उनकी पूरी सुरक्षा को लेकर यह बजट मौन है। अपने संसाधनों से प्रदेश की राजस्व आय बढ़ाने के नाम पर प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्री शुल्क बढ़ाकर प्रदेश की जनता पर आर्थिक बोझ लादने का ही काम किया है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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