महासमुंद। मंकर संक्रांति के मौके पर गरियाबंद और महासमुंद की सीमा पर स्थित हथखोज के महानदी में आयोजित सूखा लहरा, घोंडुल मेले में इस बार कोरोना का असर दिखा। संक्रमण के भय से मेले में लोगों की भीड़ कम रही। मनोकामना लेकर पहुंचे लोगों ने ही सुबह नदी में स्नान किया और पूजा-अर्चना के बाद सूखा लहरा लिया। सूखी नदी पर आस्था की डुबकी लगाई, संक्रांति स्नान किया जिसके बाद शक्ति लहरी मंदिर जाकर शिव परिवार की पूजा-अर्चना की। यहां संतान प्राप्ति की आस लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु संक्रांति के खास अवसर पर आते हैं। पूजन के बाद नदी की रेत पर लेटकर लोगों सूखा लहरा लिया।

परंपरा के मद्देनजर आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से ही लोग यहां सुबह नौ बजे से शाम तक पहुंचते रहे। बता दें कि प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। मेले का आनंद उठाने जिलेभर से लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। हालांकि इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले वर्ष की अपेक्षा लोगों की भीड़ कम दिखी।

संतान की मनोकामना

ग्राम पहंदा से आए अमर सिंह ने बताया कि वे लगातार तीन साल से मकर संक्रांति पर हथखोज पहुंच रहे हैं। हर बार वे लहरा लेते हैं। हाथ बंद कर लेटने के बाद पता नहीं लगता कि क्या हुआ। जब लोग बताते हैं, वीडियो दिखाते हैं तब पता लगता है कि रेत पर कितनी दूर खुद से परिश्रम किए बगैर लोटते रहे। आश्चर्य भी लगता है। कोई वैज्ञानिक प्रभाव होगा, किंतु हमें मालूम नहीं।

आस्था पर लेती हूं लहरा

राजिम से पहुंचीं प्रमिला साहू का कहना है कि वे करीब पांच साल से हथखोज मेला आ रही हैं। हर साल उन्हें इस मेले की प्रतीक्षा रहती है, यहां बड़ा आनंद आता है। वैसे अन्य दिनों में भी यहां आकर नदी की रेत पर लोटने का प्रयास किए, किंतु अन्य दिनों ऐसा कुछ नहीं होता। मकर संक्रांति पर बिना परिश्रम रेत पर लोटने का प्रभाव रहता है। यही इस मेले का आनंद व उत्साह है।

मेले का बाजार रहा फीका

प्रतिवर्ष मेले में होटल, फैंसी सामान, पान दुकान, चप्पल, कपड़ा आदि कई तरह की दुकान लगाने वाले लोगों को इस बार भीड़ कम रहने से नुकसान हुआ। चिंगरौद के मोहन ने बताया कि इस बार लोगों की भीड़ कम होने के साथ ही लोग खाने पीने से भी बहुत डर रहे हैं। इसलिए होटल, चाट गुपचुप आदि दुकानों में भीड़ कम रही। इस साल मेले में उन्हें अन्य वर्षो की अपेक्षा लाभ नहीं हुआ है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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