महासमुन्द (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के बारनवापारा देवपुर रिजर्व फारेस्ट में सोने की जांच करने ड्रिलिंग के लिए बनी अधिकारियों की कमेटी के चार में से तीन सदस्य निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे। केवल पीसीसीएफ वहां थे। अन्य अधिकारियों ने वहां अपने प्रतिनिधि भेज दिए थे। जहां निरीक्षण करना था, घने वृक्षों के कारण वहां तक अधिकारियों की कारों का जाना संभव नहीं था। पीसीसीएफ कार में ही रुक गए जबकि कई अधिकारी पैदल-पैदल ही लगभग चार किमी गए। इनकी वापसी भी पैदल ही हुई। वापसी पर अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से माना कि यहां ड्रिलिंग करने से वन्य क्षेत्र की बड़ी मात्रा में हानि होगी।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी के आदेश पर उक्त रिर्व फारेस्ट में ड्रिलिंग के लिए चिन्हित पाइंट का निरीक्षण करने के लिए चार अधिकारियों की टीम बनाई गई थी। स्पष्ट आदेश था कि इन्हें ही मौके पर जाना था। बावजूद 20 जून को निरीक्षण पर गई टीम ने एनजीटी के आदेश की अवहेलना की। पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी के अलावा मौके पर नामित व्यक्ति प्रतिनिधि रीजेनल आफिस आफ मिनिस्ट्री आफ एनवायरनमेंट एण्ड फारेस्ट नागपुर, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, माइनिंग, कलेक्टर बलौदाबाजार नहीं थे। हालांकि कलेक्टर बलौदाबाजार ने प्रतिनिधि अपर कलेक्टर राजेन्द्र गुप्ता को भेजा था और खनिज से संयुक्त संचालक कैलाश डोंगरे पहुंचे थे।

एनजीटी को ड्रीलिंग पाइंट तक जंगली रास्ता होने का तर्क देने वाले अधिकारियों की गाड़ियां मौके तक जा नहीं पाई। ऐसे में पीसीसीएफ चतुर्वेदी रास्ते मे ही रुक गए। जबकि अपर कलेक्टर गुप्ता, डीएफओ केआर बढ़ई, एसडीओ फारेस्ट ठाकुर, कैलाश डोंगरे व अन्य अमला चार किमी तक पैदल जंगल तक पहुंचा। और पैदल ही वापस लौटा। आमतौर पर एसी कार व केबिन में रहने वाले अधिकारी हांफते-हांफते जंगल की चढ़ाई करते रहे।

कक्ष क्रमांक 254 में ड्रिलिंग के सिर्फ सात पाइंट ही देख पाए, जिनमे तीन जंगली रपटा के दायें बाएं थे, जबकि चार पाइंट रपटा से 50- 60 मीटर घने जंगल के भीतर थे। एक पाइंट खाई से लगा हुआ था।

मौके पर गई टीम ने माना कि यहां ड्रीलिंग की अनुमति देना जंगली जीवन, प्रकृति से खिलवाड़ होगा। ड्रीलिंग की अनुमति मांगने वाली कंपनी हैंड लोडेड मशीन लेकर जाती है तब भी पेड़ कटेंगे। डीजल चलित मशीन चलाती है तो शोर होगा। जबकि ग्रामीणों के अनुसार यह क्षेत्र हाथी, भालू, बुंदीबाग (तेंदुआ) विचरण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में कई वन्य जीव जंतु हैं, जिनकी नैसर्गिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी। लोगों का आना जाना बढ़ेगा।

पीसीसीएफ चतुर्वेदी के साथ नोडल अधिकारी सुनील मिश्रा भी पहुंचे थे। इस बार उनके सुर बदले हुए थे। वे कम्पनी को ड्रीलिंग की अनुमति देने के पक्ष में नजर आए। उनका कहना था टेस्टिंग ड्रिलिंग में वन प्रभावित नहीं होगा। जबकि प्रारम्भ में 29 अप्रैल 2020 को मिश्रा की अगुवाई में बनी टीम ने अपने अभिमत में ड्रीलिंग की अनुमति देना सही नहीं ठहराया था।

बता दें कि छत्तीसगढ़ की एक नामी कंपनी देवपुर जंगल मे सर्वे कर 53 जगहों पर भूमिगत स्वर्ण भंडार का परीक्षण करने ड्रिलिंग की अनुमति मांगी है। इन्हें शासन से अनुमति मिल गई है। अनुमति मिलने से परसा कोल ब्लाक हसदेव अरण्य की तरह यहां भी जंगल प्रभावित हो रहा है।

आरटीआई कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल ने इस पर आपत्ति ली। उन्होंने आनलाइन शिकायत एनजीटी को भेजा। एनजीटी ने मामले में संवेदनशीलता दिखाई। बता दें कि संजीव अग्रवाल ने एनजीटी न्यायालय में छत्तीसगढ़ के एक निजी समूह को बारनवापारा वन क्षेत्र में सोने की खदान में सोने के पूर्वेक्षण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दी गयी अनुमति पर रोक लगाकर जंगल बचाने के लिए एक याचिका दाखिल की।

Posted By: Pramod Sahu

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