बसना। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दस्तावेज शुल्क राशि प्राप्त करके भी आवेदक को समय सीमा में सूचना दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराना जनसूचना अधिकारी को मंहगा पड़ गया। राज्य सूचना आयोग ने महेश ओगरे सचिव ग्राम पंचायत दुरूगपाली को 25 हार रूपये का जुर्माना लगाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरटीआइ कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत दुरूगपाली जपं बसना से 26 सितम्बर 2019 को सूचना आवेदन लगाकर चौदहवें वित्त योजना संबंधी सूचना दस्तावेज की मांग की। सचिव ने 23 अक्टुबर 2019 को मांगपत्र जारी कर राशि जमा करने का सूचना पत्र भेजा। आवेदक का दस्तावेज शुल्क राशि सात नवम्बर 2019 को जमा हो गया। लेकिन सचिव ने जानबुझकर आवेदक को सूचना दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। आवेदक ने दस्तावेज देने संबंधी जनसूचना अधिकारी को पुनः स्मरण पत्र भेजा। सचिव का ग्राम पंचायत कायार्लय में अनुपस्थिति के कारण डाक पत्र वापस आ गया। जनसूचना अधिकारी ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का पालन नहीं किया। जिस वजह से छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में 23 दिसम्बर 2019 को शिकायत दायर की गई। मुख्य सूचना आयुक्त एम के राउत ने इस प्रकरण में 27 सितम्बर को अंतिम सुनवाई में पाया कि अपीलार्थी से दस्तावेज शुल्क लेकर भी समयसीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराया गया, जो सूचना का अधिकार अधिनियम के विपरीत है। इसलिए इस प्रकरण में 25 हजार रूपये का जुर्माना करने का आदेश पारित किया। सीईओ जनपद पंचायत बसना को 25 हजार जुर्माना राशि जनसूचना अधिकारी महेश ओगरे के वेतन से कटौती करवाकर शासकीय कोष में जमा करके उसकी पावती सूचना आयोग में भेजने का निर्देशित किया है।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सचिव महेश ओगरे ने बताया कि वतर्मान सरपंच तौसिफ प्रधान ने ग्राम पंचायत दुरूगपाली के समस्त कायार्लयीन दस्तावेज और अभिलेखो को जबरन अपने पास रख लिया था। जिसकी सूचना सीईओ जनपद पंचायत बसना को दिया गया है। इसलिए आरटीआई कार्यकर्ता विनोद दास को सूचना दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी हुआ है। समस्त दस्तावेजों का निरीक्षण परीक्षण करने और शिकायतकर्ता का तर्क को सुनने के बाद जनसूचना अधिकारी के इस तर्क को मुख्य सूचना आयुक्त ने विलंब का उचित पर्याप्त कारण मानने से इंकार कर दिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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