पैकिन-सरायपाली(नईदुनिया न्यूज)।

अंचल सहित देश व प्रदेश में भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षा बंधन इस बार सोमवार तीन अगस्त को है। इस दिन भाई की दीघार्यु के लिए बहनें कलाई में राखी बांधती हैं और बहन की रक्षा करने का वचन भाई देता है। इस बार सावन पूर्णिमा पर अद्भुत संयोग इसे खास बना रहा है, जबकि सावन का आखिरी सोमवार भी पड़ रहा है। ग्राम पैकिन के पंडित सव्यसाची मिश्रा ने बताया कि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि- दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र व प्रीति योग बन रहा है। सोमवार को सावन माह की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसी तिथि पर रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस बार सुबह 9ः30 बजे तक भद्रा रहेगी। पंडित मिश्रा ने कहा-भद्रा के बाद 9.31 बजे से बहने पूरे दिन राखी बांध सकती हैं। इस बार श्रावणी नक्षत्र का संयोग पूरे दिन रहेगा। इसलिए पर्व की शुभता और बढ़ जाती है। रक्षाबंधन पर इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है।

जो भाई-बहन कोरोना के चलते इस बार दूर हैं, वो जल्दबाजी न करें, जहां हैं वहीं से रक्षाबंधन मनाएं। वीडियो-ऑडियो कॉल से एक दूसरे को देख, दुआएं करें, लम्बी उम्र की मनोकामना करें।

सावन का अंतिम सोमवार

सावन पूर्णिमा पर स्नान-दान का भी विधान है। सावन का अंतिम सोमवार होने से रुद्राभिषेक-पूजन आदि के विधान अनुष्ठान भी पूरे किए जाएंगे। इसी दिन वैदिक ब्रह्माण श्रावणी उपाकर्म के विधान भी पूरे करेंगे। हालांकि कोरोना संकट के कारण सभी अनुष्ठान घर में ही करने होंगे।

रक्षाबंधन की कथा

पौराणिक मान्यता अनुसार सतयुग में देवताओं-दानवों में 12 वर्ष तक युद्ध हुआ। देवता बार-बार हारते चले गए। देव गुरु बृहस्पति की आज्ञा से युद्ध रोक दिया गया। देवगुरु के आदेश पर इंद्राणियों ने इंद्र का रक्षा बंधन किया। रक्षा सूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र ने दैत्यों का संहार किया और देवताओं को विजय मिली। यह तिथि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा थी, तभी से सनातन धमिंर्यों में रक्षा बंधन पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, इसके अलावा महाभारत के युद्ध में युधि्रिर ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर सभी सैनिकों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था और कौरवों के विरुद्ध युद्ध में विजय प्राप्त की थी। इस दिन बहनें अपने भाइयों को और ब्राह्मण अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांध कर एक वर्ष के लिए सुरक्षति कर देते हैं।

रक्षासूत्र का मंत्र है

येन बद्धो बली राजा दानवेद्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

इस मंत्र का अर्थ है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षे! (रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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