महासमुंद, नईदुनिया प्रतिनिधि। कुकराडीह में मंगलवार की रात हाथी को घूमता देखकर ग्रामीणों ने वन अमले को सूचना दी। जब तक वन अमला पहुंचा तब तक हाथी को ग्रामीणजन गांव से बाहर खदेड़ चुके थे। सूचना के बाद समय पर अमला नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने वन अमले की पिटाई कर दी। घटना में 61 वर्षीय वनपाल शिरिल सिद्दक को चोट आई है। देर रात तुमगांव थाना में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है। रेंजर मोहनदास मनिकपुरी ने बताया कि मंगलवार शाम दंतैल हाथी के लहंगर क्षेत्र में विचरण की सूचना आई। इस पर अमले के साथ वे पहुंचे। यहां पतासाजी की गई, तब तक हाथी गांव से दूर जा चुका था। अमला यहां करीब दो घंटे तक डटा रहा। इसी बीच कुकराडीह गांव से सूचना आई। बताया गया कि हाथी गांव की गलियों में घूम रहा है।

सूचना मिलते ही अमला कुकराडीह के लिए रवाना हुआ। ज्ञात हो कि कुकराडीह हाथी प्रभावित सिरपुर क्षेत्र का गांव है। जहां हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत की घटना अक्टूबर में हो चुकी है। अमला जब तक पहुंचा, इससे पहले ही कुकराडीह के ग्रामीणों ने मशाल जलाकर हाथी को गांव से बाहर खदेड़ दिया था।

पेट्रोलिंग वाहन के साथ रात 9 बजे अमला पहुंचा। मानिकपुरी ने बताया कि यहां आक्रोषित ग्रामीणों ने जमकर गाली गलौज की। बाद वाहन की चाबी निकाल लिया। वाहन में सवार शिरिल सिद्दक (61) से धक्कामुक्की कर मारपीट की। इससे उनके हाथ, सिर व शरीर के कुछ अंगों में चोट आई। किसी तरह से वन अमले को गांव से निकाला गया। इसके बाद देर रात घटना की लिखित सूचना तुमगांव थाना में दर्ज कराई गई।

अमला देर से पहुंचा तो बिफरे ग्रामीण

शिकायत में सिद्दक ने किसी की नामजद शिकायत नहीं की है। इधर बताया गया है कि लोग हाथी के हमले और ग्रामीण की मौत से भयभीत हैं। सूचना के बाद जब घंटे भर बाद भी अमला नहीं पहुंचा, तब जान बचाने ग्रामीणों ने खुद ही मशाल थाम कर हाथी को गांव से भगाया। भयभीत ग्रामीण वन अमले की मदद नहीं मिलने से आक्रोशित थे। इसी बीच अमला पहुंचा और ग्रामीणों का गुस्सा उन पर फूट पड़ा और गुस्से का शिकार वनपाल सिद्दक हुआ।

परेशान हैं ग्रामीण

इधर वन अमले के सुस्त कार्रवाई से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण परेशान हैं। हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति संयोजक राधेलाल सिन्हा ने बताया कि सूचना पर लंहगर पहुंचा वन अमला दूर से हाथी देखता रह गया। इधर हाथी खेत में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाता रहा। कुछ देर बाद अमला लौट गया। सिन्हा ने कहा हाथी भगाने ग्रामीणों को अमले ने कुछ नहीं दिया। केरोसिन भी देना बंद कर दिया है। क्षेत्र के किसानों को कीटनाशक के अलावा फसल बचाने केरोसिन भी खरीदना पड़ रहा है।

जनपद सदस्य योगेश्वर चन्द्राकर ने बताया कि पिछले आंदोलन में वन अमले से हाथी भगाने पर जो सहमति बनी थी, उसे पूरा नहीं किया जा रहा है। कुकराडीह रास्ते की घास फूस साफ जरूर कराया गया। शेष मसलों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राजनीतिक अड़ंगेबाजी से काम रोका जा रहा है। इस संबंध में तुमगांव टीआइ योगेश सोनी ने कहा कि वे अवकाश पर हैं। मामले की जानकरी लेकर ही इस मामले में कुछ बता पाएंगे।

Posted By: Prashant Pandey

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