महासमुंद। संबलपुर से रायपुर डिवीजन की ओर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें कोरोना काल से बंद है जिसे रेलवे बोर्ड द्वारा अब तक शुरू नहीं किया गया है।

और इधर, जो ट्रेनें चल रही है उसे बोर्ड द्वारा किसी ना किसी कारण से बंद कर दिया जा रहा है। जिसका खमियाजा यात्रियों को भुगताना पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजलों कीमतों में हुई वृद्धि के बाद से पहले ही बसों का किराया बढ़ गया है जिससे बसों में सफर करना यात्रियों के लिए महंगा साबित हो रहा है।

दैनिक ट्रेनें बंद होने का नुकसान सबसे अधिक दैनिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। वे रायपुर-दुर्ग का सफर बसों में दोगुना किराया देकर कर रहे हैं। जिसे देखते हुए यात्री लंबें समय से संबलपुर से रायपुर डिवीजन की ओर चलने वाली पैसेंजर व अन्य ट्रेनें चलाने की मांग कर रहे है। लेकिन बोर्ड द्वारा अब तक ट्रेनों के परिचालन के लिए किसी तरह की सूचना जारी नहीं की गई है।

बता दें कि महासमुंद से रायपुर का किराया 70 रुपये है जबकि ट्रेन में इसका आधा किराया है।

कोरोनाकाल से यह ट्रेनें है बंद

जानकारी के अनुसार कोरोनाकाल से टिटलागढ़- रायपुर पुशपुल, विशाखापटनम-रायपुर, विशाखपटनम-जगदलपुर, रोंगोंबती एक्सप्रेस बंद है। इसके अलावा वर्तमान बोर्ड द्वारा संधारण कार्य के लिए बिलासपुर-बिकानेर, बिलासपुर-भगत की कोठी, विशाखापटनम -एलटीटी, बिलासपुर-भुनेश्वर सहित कुछ ट्रेनों को बंद कर दिया गया है।

तीर्थयात्री और विद्यार्थियों को परेशानी

सप्ताह में शिर्डी और राजस्थान के लिए विशाखापटनम से होते महासमुंद होकर गुजरने वाली साप्ताहिक ट्रेनों के बंद होने से शिर्डी की यात्रा में जाने वाले तीर्थयात्री और राजस्थान के कोटा में उच्चशिक्षा के लिए जाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

टिकट एजेंट लक्की सिंह ने बताया कि ट्रेनों को अचानक स्थगित किए जाने से उनके द्वारा बुकिंग की गई कई टिकटों को उन्हें रदद करना पड़ा है। उन्होने बताया कि ट्रेनों के बंद होने से उनका व्यवसाय प्रभावित है और ट्रेन कैंसल होने से नुकसान हो रहा है।

दैनिक यात्रियों ने बदला धंधा

एक ट्रेन लोगों के जीवन मे क्या परिवर्तन ला सकती है इसका अंदाजा ट्रेन परिचालन बंद होने से लगने लगा है।

दरअसल कोरोना काल से पहले जहां जिले के कोमाखान, बागबाहरा, महासमुन्द व बेलसोंडा स्टेशन से तीन से साढ़े तीन हजार दैनिक यात्री रायपुर, भिलाई व दुर्ग जाकर कामकाज करते थे।

कोरोना काल मे ट्रेन बंद होने से इनका व्यवसाय छीन गया है। अब यदि वे खुद के साधन या बस से सफर करें तो उनका आधे से ज्यादा वेतन इस पर खर्च हो रहा है। ऐसे में लोगों ने अपना व्यवसाय बदल दिया है। पप्पू बजाज पहले रायपुर में फल व्यवसायी के यहां नौकरी करते थे। सुबह 10 बजे रायपुर पहुंचना और रात इसी समय ट्रेन से लौटना होता था। ट्रेन बंद होने से वे अब खुद से फल बेचने लगे हैं।

राजू यादव पहले कपड़ा मार्किट पंडरी में नौकरी करते थे, अब आधे वेतन में महासमुंद में ही नौकरी कर रहे हैं। संजय देवांगन अब रायपुर में ही रूम लेकर नौकरी जारी रखे हैं। उनका कहना है कि ट्रेन चलती तो वे रायपुर में रूम नहीं लेते।

बोर्ड तय करता है परिचालन

ट्रेनों के परिचालन का फैसला बोर्ड तय करता है। यह सही है कि कोरोनाकाल से बंद ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं हो पाया है। रही बात वर्तमान में ट्रेनों के स्थगित होने की तो इसे संधारण के लिए बंद किया गया है।

-त्रिबिक्रम सेठ- पीआरओ रेलवे संबलपुर डिवीजन

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Posted By: Nai Dunia News Network

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