Ram Mandir Bhumi Pujan : नुआपड़ा, राकेश शर्मा। पांच अगस्त को राम जन्मभूमि में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे भक्तों में उल्लास और बढ़ता जा रहा है। 14 वर्षों के वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण के पग ओडिशा के नुआपड़ा जिले के पातालगंगा में भी पड़े थे। यहीं कारण है कि मंदिर निर्माण को लेकर यहां के लोगों का उत्साह भी देखने लायक है और भूमि पूजन के लिए विहिप कार्यकर्ताओं द्वारा पातालगंगा का पवित्र जल व मिट्टी एकत्रित कर डाक द्वारा अयोध्या भेजी गया है।

जिला मुख्यालय नुआपड़ा से 85 किलोमीटर दूर गुरुडोंगर पहाड़ों के बीच स्थित है प्रसिद्ध तीर्थस्थल पातालगंगा है। पौराणिक मान्यताओं अनुसार चौदह वर्षों के वनवास के दौरान भगवान श्री राम, देवी सीता और लक्ष्मण ने दंडकारण्य में भ्रमण किया था। डोंगर जंगल से गुजरने के दौरान माता सीता को प्यास लगी। दूर-दूर तक जल का कोई स्रोत नहीं होने पर माता सीता की प्यास बुझाने के लिए लक्ष्मण ने भगवान श्री राम की आज्ञा से माता गंगा का आव्हान कर अपने तीर से धरती को छेदकर पानी निकाला था। त्रेतायुग से यह स्थान पातालगंगा के रूप में जाना जा रहा है।

पातालगंगा के जल का महत्व गंगाजल से कम नहीं है। कहा जाता है कि पातालगंगा का जल कभी नहीं सूखता है। यहां स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के पापों का नाश होता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। लोगों का मानना है कि पातालगंगा के जल में स्नान करने से कई तरह के रोगों से भी निजात मिल जाती है। धरती से निकल कर पातालगंगा का पानी एक कुंड में जमा होता है।

इस कुंड की एक और विशेषता यह भी है कि इस कुंड का जल कभी भी कम या ज्यादा नहीं होता है। कितनी भी गर्मी हो या मूसलाधार बारिश इस कुंड का जलस्तर पूरे वर्ष एक समान रहता है। कहा जाता है कि यहां एक वट वृक्ष की छाया तले भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने विश्राम भी किया था। यहां तीनों के पदचिह्न भी मौजूद हैं। मान्यता है कि यहां वट वृक्ष में नारियल बांधने से मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस तीर्थक्षेत्र में सिर्फ पातालगंगा ही नहीं बल्कि 100 वर्षों से अधिक पुराना जगन्नाथ मंदिर, महामृत्युंजय शिव मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, दुर्गा मंदिर, गायत्री मंदिर व आलेख महिमा मठ स्थित है।

आमतौर पर सभी जगन्नाथ मंदिरों में तीन मूर्तियों की पूजा की जाती है जिसमें भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियां शामिल है। लेकिन यहां स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की दो मूर्तियों सहित कुल चार मूर्तियां स्थापित है। राम नवमी, माघ पूर्णिमा, बैशाख पूर्णिमा, रथ यात्रा, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, नवरात्र आदि पर्वों पर यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना के लिए आते हैं। पातालगंगा के अलावा जिले के पतोरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर, बूढ़ीकोमना स्थित पातालेश्वर शिव मंदिर आदि तीर्थ स्थलों से भी विधिवत रूप से पवित्र जल व मिट्टी एकत्रित कर अयोध्या भेजी गई है।

Posted By: Prashant Pandey

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Raksha Bandhan 2020
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