महासमुंद। पिछले कुछ दिनों से बिगड़े मौसम और जिले में बढते कोरोना संक्रमण के कारण इस बार मकर संक्रांति पर्व पर लोगों ने नदी-तालाबों में आस्था की डुबकी लगाने की बजाए घरों में स्नान कर पूजा-अर्चना कर पर्व मनाया।

कैलेंडर में पर्व दो दिनों का होने से ज्यादातर लोगों में संशय की स्थिति रही। कई लोग जहां शुक्रवार को पर्व मना रहे है वही कई लोग शनिवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे।

इधर, बाजार में तिल के लड्डू की भारी मांग रही। लोगों ने पूजा-अर्चना पश्चात एक-दूसरे को तिल के लड्डू देकर पर्व की शुभकामनाएं दी।

नगर पुरोहित पंडित पंकज तिवारी ने बताया कि तय तिथि के अनुसार मकर संक्राति का पर्व शुक्रवार को ही रहा। उन्होने बताया कि यह दान का पर्व है इसलिए पूजा पश्चात तिल-तेल चांवल आदि का दान मंदिरों के साथ याचकों में कर पुण्य लाभ लें सकते हैं।

संक्रमण के चलते स्थगित हुआ सूखा लहरा मेला

इधर, कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या के चलते प्रतिवर्ष गरियाबंद और महासमुंद जिले की सीमा पर स्थित चिंगरौद से लगे हथखोज में महानदी तट पर होने वाला सूखा लहरा मेला स्थगित कर दिया गया। यहां प्रतिवर्ष यहां पर बड़ी संख्या में लोग सूखा लहरा (रेत में लोटकर) लेने के साथ मेले का आनंद उठाने के लिए पहुंचते हैं।

लेकिन इस बार संक्रमण की वजह से यहां सन्नाटा पसरा रहा। वहीं बीते दिनों हुई बारिश से नदी में पानी है, जिससे रेत पर सूखा लहरा लेने की स्थिति नही है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयोजित मेला मड़ई का कार्यक्रम भी इस बार संक्रमण के चलते स्थागित रहा।

धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए पहुंचे लोग

मकर संक्रांति के मददेनजर जिले के धार्मिक स्थलों में दिनभर लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे। सिरपुर स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर, बम्हनी, कनेकेरा, दलदली सहित अन्य शिव मंदिरों में सुबह से दर्शन पूजा-अर्चना के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।

लोगों ने की सामान्य पूजा-अर्चना

हथखोज में शक्ति लहरी का मंदिर है। यह वर्षों पुराना मंदिर है। यहां संक्रांति पर मेले का आयोजन होता है, जो इस इस बार नहीं हुआ। यहां पर्व विशेष पर ख़ासकर संतान सुख की कामना लेकर महिलाएं, नवविवाहित पहुंचते हैं। शक्ति लहरी से कामना करते हैं।

यह मंदिर शिव पार्वती का मंदिर है। इस बार मेला नहीं हुआ, बावजूद इसके लोग दर्शन करने कम संख्या के पहुचे। लोगों ने सामान्य रूप से पूजा अर्चना की। यहां महानदी पर सप्तधारा का संगम बताया जाता है। लोग यहां आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस बार यहां भंडारा का भी आयोजन नहीं हुआ।

क्षेत्र में सूखा लहरा के नाम से यहां का मेला ख्यात है। संक्रांति पर पर लोग यहां नदी की रेत पर लेटते हैं और स्वतः घूमने लग जाते हैं। इसके पीछे लोगों की आस्था और धार्मिक मान्यता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local