सरायपाली । महंगाई का असर खाद्य पदार्थों के बाद अब पढ़ाई पर भी पढ़ रही है। अब शिक्षा ग्रहण करना भी पहुंच से दूर होने लगा है। निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाए जाने से परेशान पालकों को दोहरा झटका लगा है। पिछले साल के मुकाबले स्कूल की किताबें ही नहीं कापी, स्टेशनरी के साथ पेंसिल स्याही आदि के दाम भी 30 फीसद तक बढ़ गए हैं। अभिभावकों को कापी किताब और स्टेशनरी पर एक बच्चे के पीछे पांच से सात हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।

पहले यह सामान तीन से पांच हजार तक मिल जाता था । स्कूलों के हिसाब से कापी किताबों के दाम भी अलग-अलग है। जिन स्कूलों की फीस अधिक है उनकी ड्रेस सहित अन्य सामग्री भी महंगी है। खास बात यह है कि प्रत्येक स्कूल का एक अलग दुकानदार से अनुबंध है। संबंधित स्कूल को पुस्तकें, ड्रेस एक ही दुकान में मिल रही है। दाम में भी बारगेनिंग की गुंजाइश नहीं है।

इस बार किताब कापी से लेकर स्कूल की ड्रेस तक इतनी महंगी हो गई है जिससे घरेलू बजट गड़बड़ा गया है।

इन दिनों हर तरफ महंगाई की मार ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।

दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की ऑनलाइन क्लास में अभिभावकों को किताब कॉपियों पर कम खर्च करना पड़ा था। लेकिन अब कोरोना का कहर काबू होने के बाद से स्कूलों में बच्चों की कक्षाएं भी ऑफलाइन हो गई है।

कागज के दाम बढ़ने से बढ़ी महंगाईः विक्रेताओं की माने तो पठन पाठन सामग्री के दाम बढ़ने की प्रमुख वजह कागज पर और स्याही पर जीएसटी अधिरोपित होना है। उनका कहना है कि जीएसटी बढ़ने पर उनका जोर नहीं है। ऐसे में दाम तो बढ़ना तय है। कापियां महंगी तो हुई ही है। उनके पे भी कम कर दिए गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह दोहरी मार है। पहले जिस कापी में सौ पे थे। अब वह घटकर 80 ही रह गई है। कुछ कॉपियों की लंबाई और चौड़ाई कम हो गई है। पेंसिल की लंबाई में भी अंतर आया है।

ट्रांसपोर्टिंग खर्च बढ़ने से बढ़े दामः

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तेजी के कारण ट्रांसपोर्टिंग का खर्च बढ़ गया है। इससे उन्हें सामान मंगाने में ज्यादा खर्च वहन करना पड़ रहा है। यही वजह है कि प्लास्टिक पेपर व मेटल व उनसे बनने वाले सामानों के दाम बढ़ गए हैं। स्टेशनरी सामान में 10 से 15 फीसद की तेजी आई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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