महासमुंद । केंद्र व राज्य स्तरीय जनप्रतिनिधियों के अथक प्रयास से महासमुंद जिला को मेडिकल कालेज मिला। यहां

अब चिकित्सा शिक्षा सुलभ होगी। यहां से पढ़कर नए डाक्टर निकलेंगे। इधर क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधि जिले के समुचित विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अपनों को अनैतिक लाभ पहुंचाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे हैं।

बता दें कि जिला अस्पताल परिसर से लगे जीएनएम छात्रावास को कोविड काल में नवीनीकृत कर कोविड हास्पिटल बनाया गया। अब यहीं मेडिकल कालेज संचालित किया जा रहा है।

मई 2021 में मेडिकल कालेज का अधिग्रहण किया गया। तब से मेडिकल कालेज परिसर में मेस का संचालन हो रहा है, वह भी बिना किराया निश्शुल्क। यानी कि संचालक, मेस संचालन के एवज में मेडिकल कालेज को कोई किराया अदा नहीं करता, उसे मेडिकल कालेज ने मुफ्त में डेढ़ हजार वर्गफीट का सुव्यवस्थित किचन, केफेटरेरिया दिया है। संचालक यहां अपने वर्कर रखकर सुबह से रात तक चाय, नास्ता, भोजन सबकुछ सप्लाई करता है। लगभग सौ का स्टाफ जिसमें चिकित्सक प्राध्यापक, स्टाफ, यहां पैसे देकर चाय, भोजन, नास्ता करते हैं, जिससे बिना टेंडर का वेंडर यहां हरदिन लगभग आठ से 10 हजार रुपये का कारोबार करता है।

बता दें कि किसी दुकान के सामने भी जब कोई ठेला वाला फल, चाय नास्ता का ठेला लगाता है तो दुकान संचालन उसे वहां खड़े रहने का शुल्क वसूल लेता है, किंतु यहां मेडिकल कालेज ने डेढ़ हजार वर्गफीट का किचन, केफेटरेरिया अनजान वेंडर को मुफ्त में दे दिया है, वह भी सालभर से।

जबकि, इसी परिसर से सौ मीटर की दूरी पर लगे मेडिकल कालेज अस्पताल में मेस/ कैंटीन संचालक से मेडिकल कालेज हास्पिटल प्रबंधन हर माह एक लाख 51 हजार रुपये किराया वसूलता है।

न कौन है यह सीएच फिलिप, जिसे कोविड काल के दौरान तात्कालिन कलेक्टर व सीईओ जिपं ने बिना टेंडर बुलाये कोविड सेंटर में 280 रुपये प्रति दिन प्रति मरीज की दर से कोविड मरीजों के भोजन का काम दिया था, जबकि बाजू जिला अस्पताल में वेंडर सौ रुपये में प्रतिदिन प्रति मरीज भोजन उपलब्ध करा रहा था। कोविड काल में पड़ोसी जिला गरियाबंद के कोविड सेंटर में 220 रुपये की दर से प्रति दिन प्रति मरीज भोजन दिया जा रहा था, फिर इसी वेंडर को रायपुर से 10 रुपये कम और गरियाबंद से 60 रुपये ज्यादा दर पर काम बिना टेंडर कैसे दिया गया।

न मेडिकल कालेज में यदि नया टेंडर नहीं मंगाया जा सका, तो सौ मीटर की दूरी पर मेडिकल कालेज हास्पिटल में सालाना टेंडर लेकर कैंटीन संचालन कर रहे वेंडर को क्यों नहीं अवसर दिया गया, यह सब सवाल अनसुलझे हैं, जिनका जवाब जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं।

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