बिरकोनी । ग्राम बिरकोनी में बुधवार को राम जानकी मंदिर, उपाध्याय नगर, भाटापारा साहू छात्रावास के पास और घरों में हलषष्ठि पर्व धूमधाम के साथ मनाया। सभी महिलाएं एकत्रित होकर संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर जगह-जगह सामूहिकरूप से पूजन की। एक दिन पहले ही महिलाएं पूजा अर्चना की तैयारियों में जुटी रही।राम जानकी मंदिर परिषद में सुबह 11 बजे से पूजा स्थान में सगरी बनाकर खम्हार पत्ता, कासी, बेल व फूलों से सजाया और हलषष्ठि माता की पूजा की।भाटापारा साहू छात्रवास में महिलाओं ने सगरी के पास मिट्टी के शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश, नंदी, भावरा, बाटी, मिट्टी से बनाकर स्थापित किया। सगरी में छह लोटा जल अर्पित कर पूजा प्रारम्भ किया गया।

भैंस के दूध से बने घी और दही इसके साथ ही हल की जोताई और बोवाई से उत्पन्ना अन्ना को छोड़ कर पसहर चावल, छह प्रकार भाजी, महुवा, आम, पलास की पत्ती, कांसी के फूल, नारियल, लाई सहित अन्य पूजन सामग्री से पूजन कर

व्रत पूरा किया।

आचार्य लक्ष्‌मी नारायण वैष्णव ने बताया कि द्वापर युग में माता देवकी द्वारा खमरछठ व्रत किया गया था, क्योंकि खुद को बचाने के लिए कंस उनके सभी संतानों का वध करता जा रहा था। उसे देखते हुए देवर्षि नारद ने हलषष्ठी माता का व्रत करने की सलाह माता देवकी को दी थी। उनके द्वारा किए गए व्रत के प्रभाव से बलदाऊ और भगवान कृष्ण कंस पर विजय प्राप्त करने में सफल हुए। उसके बाद से यह व्रत हर माता अपनी संतान की खुशहाली और सुख-शांति की कामना के लिए करती है।

संतान प्राप्ति के लिए भी इस दिन जो महिलाएं व्रत की कथा सुनती है, उन्हें संतानरत्न की प्राप्ति होती है। इस दिन हलषष्ठि माता की भी पूजा की जाती है। इसमें अनेक व्रत और उत्सव के साथ ही साधकों के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को शास्त्रों में भी संतान की रक्षा के लिए माताओं के लिए श्रेष्ठ बताया गया है।हलषष्ठी पर भगवान बलराम का जन्मदिन भी मनाया। व्रत में अधिक संख्या में माताएं निर्जला व्रत करते हुए कथा का श्रवण की और अपनी संतानों की दीर्घायु एवम खुशहाली की कामना की।घर आकर कुल देवी देवता की पूजा अर्चना व भोग प्रसाद लगाया। महुआ के पत्तों से बने पत्तल में पसहर चांवल, मुनगा भाजी, तराई, मिर्च, भैंस के दूध, दही का बना प्रसाद ग्रहण कर व्रत समाप्त किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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