महासमुंद। शहर सहित जिले में पिछले कुछ वर्षों से क्षेत्र के बाजार में 10 रुपये के सिक्कों का प्रचलन बंद है, जबकि यह सिक्का वैध है और सरकार की ओर से प्रचलित है। प्रशासन और बैंक प्रबंधन ने सिक्कों से लेन-देन करने निर्देश जारी किया और नहीं लेने वालों के खिलाफ शिकायत भी करने कहा। बाद भी सिक्का प्रचलन में ही नहीं आया।

खास बात यह है कि इस बीच प्रशासन के पास सिक्के नहीं लेने की एक भी शिकायत नहीं पहुंची। यही कारण है कि आज भी 10 के सिक्के उपयोगविहीन रखे हुए हैं।

इधर, लीड बैंक अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि सिक्के वैधानिक है। यह लोगों की सुविधा के लिए आरबीआइ ने जारी किया है। बैंक भी सिक्के लेने से इंकार नहीं कर सकते हैं।

आरबीआइ से बैंक के लिए एक दिन में एक व्यक्ति से एक हजार रुपये तक के सिक्के लेने के निर्देश है। रही बात बैंक द्वारा नहीं लेने की तो नोटों की आउंटिंग मशीन है सिक्कों की नहीं। इसलिए भी सिक्के के लेन-देन में बैंकों को दिक्कत होती है।

व्यापारियों का कहना है कि 10 को छोड अन्य सिक्के की जगह ग्राहक सामान लेना उचित मानते है। सिक्के लेकर चलाने में दिक्कत होती है जबकि नोट आसानी लेकर चला जा सकता है।

शहर के छोटे-बडे व्यापारियों का कहना है कि बाजार में अब 10 रुपये के सिक्के ही दिखाई नहीं देते।

दान पेटियों से निकलते हैं सिक्के

सिक्के बाजार में नहीं चल रहे है इसलिए लोग धार्मिक स्थल के दान पेटियों ,किसी सामाजिक संस्थाओं की दान पेटियों में बाजार के अघोषित रूप से न चलने वाले सिक्के डाल रहे है। जानकारी के मुताबिक 10 के सिक्के मंदिर की दान पेटियों से खूब निकलते है। मंदिर -मस्जिद ट्रस्ट वाले इसे बैंकों में जमा करवाते है। उनका भी कहना है कि बैंकों में बार-बार जानकारी देने के बाद बड़ी मुश्किल से यह सिक्के जमा होते है।

सबका कहना है लिखित शिकायत कीजिए

10 रुपये के सिक्के नहीं लेने पर आरबीआइ, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का एक ही जवाब है, शिकायत कीजिए कार्रवाई होगी। प्रशासन की ओर से भी हर बार यह सूचना जारी की जाती है कि कोई भी 10 रुपये के सिक्के लेने से इंकार करता है तो उसकी सीधी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की जा सकती है।

आरबीआइ के अनुसार राष्ट्रीय मुद्रा के अपमान का मामला

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कभी भी 10 रुपये के सिक्के बंद नहीं किए। आरबीआइ के नियमों के अनुसार कोई कारोबारी इसे लेने से इंकार करता है और उसकी शिकायत होती है तो यह राष्ट्रीय मुद्रा का अपमान माना जाएगा। इस मामले पर कारोबारी पर एफआईआर हो सकती है।

व्यापारी -ग्राहक में होती है बहस

10 के सिक्के व्यापारी लेते है तो ग्राहक उनसे नहीं लेता है। यही कारण है कि सिक्कों को लेकर व्यापारी और ग्राहक में बहस भी होती है। व्यापारी सिक्के अगर बैंक में जमा करने जाता है तो उनसे बैंक ही नहीं लेता है।

-शंभू साहू, अध्यक्ष चेम्बर ऑफ कॉमर्स

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सिक्के नहीं लेना अवैधानिक है

10 रुपये का सिक्के लेना चाहिए, नहीं लेना गलत है। कोई भी इन सिक्कों को लेने या इसके बदले में सामान देने से इंकार नहीं कर सकता है। मैंने भी सिक्के नहीं चलने की शिकायत सुनी है।

-भागवत प्रसाद जायसवाल, एसडीएम महासमुंद

Posted By: Nai Dunia News Network

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