महासमुंद। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में सोमवार को कलेक्टर डोमन सिंह ने जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। कृषि, वेटनरी, उद्यानिकी, मत्स्य और रेशम विभाग के काम-काज की प्रगति की समीक्षा की। कलेक्टर डोमन सिंह ने बारी-बारी से अधिकारियों से काम-काज का ब्योरा लिया।

उन्होंने जिले की सभी गोठानों को सक्रिय कर जल्दी स्वावलंबी बनाने के लिए विशेष जोर दिया। जिले में गोठानों को आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। यहां बड़ी मात्रा में वर्मी कंपोस्ट का निर्माण भी महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से किया जा रहा है।

उन्होंने मत्स्य पालन अधिकारी को गोठानों का निरीक्षण कर मछली पालन, बत्तख पालन आदि की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। इसी तरह रेशम उद्योग को भी अपनी कार्ययोजना देने को कहा। कलेक्टर ने कहा कि गोठानों के पास बने वाटर शेड का बेहतर उपयोग गोठानों के लिए किया जाए। उन्होंने कृषि अधिकारी को गोठानों के आस-पास बने वाटर शेड की सूची देने को कहा।

कलेक्टर डोमन सिंह ने पशु चिकित्सक से जिले में बर्ड फ्लू नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए किए गए उपायों के बारें में जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि बर्ड फ्लू के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए सभी कारगर कदम उठाए जाएं।

ग्रामीण और शहरी गोठानों में क्रय किए गए गोबर एवं कम्पोस्ट खाद उत्पादन की जानकारी ली। कृषि एसआर. डोंगरे ने बताया कि अब तक 78 ग्रामीण और आठ शहरी गोठानों में कुल एक लाख 34 हजार 342 क्विंटल गोबर खरीदा गया है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 78957 क्विंटल प्रदाय किया गया।

उन्होंने 1096 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया। लगभग चार सौ क्विंटल की बिक्री की गई है। अधिकारी ने जानकारी दी कि 25 विभागों से 28 सौ क्विंटल की जैविक खाद की मांग आई है। जिसमें चार सौ क्विंटल से अधिक का उठाव संबंधित विभागों ने कर लिया है। कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा कि गोठान ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाव देने के साथ ही ग्रामीणों और पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी है।

इसलिए वित्तीय प्रबंधन और वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण से लेकर बिक्री तक का निर्धारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से तैयार हुई वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री जिले की बड़े किसानों के साथ-साथ वन विभाग, कृषि, उद्यानिकी, नगरीय प्रशासन विभाग को पौध रोपण और उद्यानिकी के समय बड़ी मात्रा में खाद की आवश्यकता होती है। बेस की पूर्ति गोठानों में तैयार वर्मी कम्पोस्ट खाद से करें।

उन्होंने बड़े किसानों और जिले के विभिन्ना उद्योगों को कम्पोस्ट खाद क्रय करने के लिए प्रेरित करने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि जिन गोठानों में पैरा एकत्रित नहीं हुआ है, वहां किया जाए और किसानों को पैरादान करने के लिए कहा जाए।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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