बसना। इन दिनों पबजी बैन होने के बाद भी बच्चों के सिर मोबाइल पर गेम खेलने का बुखार चढ़ा हुआ है। बसना शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों फ्री फायर गेम बच्चे खेल रहे हैं।

हालांकि पबजी के दौर में भी इस गेम की खासी डिमांड थी, लेकिन पबजी बैन होने के बाद अब फ्री फायर गेम बच्चों पर नशा बन कर छा रहा है।

सैनिक, छावनी और शत्रुओं पर हमले जैसे चोंचले इस गेम में भी पबजी जैसे ही हैं। दीवानगी का यह आलम है कि दिन-दिन भर बच्चे मोबाइल पर यह गेम खेलने में व्यस्त रह रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक बच्चों को घर और चौक-चौराहों, दुकानों की सीढ़ियों व घरों के दरवाजे पर मोबाइल पर गेम खेलते सहज ही देखा जा सकता है। कुछ बच्चे एक दूसरे साथी को जोड़ कर गेम खेलते हैं तो कुछ देखने के लिए नजर गड़ाए रखते हैं।

यह स्थिति बसना के प्रत्येक वार्डो के चौक चौराहों में शाम को आसानी से देखने को मिल जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के किराना दुकान पान ठेला समेत तालाब किनारे यह नजारा आसानी से देखने को मिलता है।यही नारा बसना शहर के वार्ड नौ में हर दिन शाम छह बजे से रात के नौ बजे तक बच्चों के बीच देखने को मिलता है।

सांसद प्रतिनिधि एवं भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष कामेश बंजारा ने बताया कि पब्जी नामक गेम को मोदी सरकार द्वारा जिस तरह से बंद किया गया था उसी तरह से आनलाइन लत वाले गेम को सरकार को तुरंत बंद करना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता अजय टंडन ने बताया कि हिंसक गेम में मशगूल हो कर बच्चे भी हो हिंसक रहे है। पबजी और फ्री फायर जैसे गेम हिंसक हैं।

इसके लत में फंसे बच्चों का मानसिक संतुलन गड़बड़ाने, स्वजनों का पैसा बर्बाद करने समेत कई बार आत्म हत्या कर लेने जैसी कई घटनाएं देशभर से सामने आई हैं। इन गेम खेलने वाले बच्चों के सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है और वे चिड़चिड़ा होते जा रहे हैं। अनेक अभिभावकों ने कहा कि मोबाइल पर गेम खेलने की लत से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो कर रह गयी है।

वे लत नहीं छूटा तो उनका जिंदगी भी बर्बाद हो जाएगी। कोविड महामारी में लगे कर्फ्यू लाकडाउन से जो समय बच्चों को मिला है उनका यह दुरुपयोग कर आनलाइन गेम में अपना समय अत्यधिक बर्बाद किये है।

इंटरनैट गेम के इस्तेमाल से युवा खेलकूद से हो रहे दूर-शैलेंद्र नायक

नेशनल वालीबाल प्लेयर शैलेंद्र नायक ने बताया कि इंटरनैट से जहां लोगों को फायदे हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसके नुकसान भी देखने को मिल रहे हैं। इंटरनेट आनलाइन गेम का इस्तेमाल करने वाले युवा व बच्चे अक्सर मोबाइल फोन, लैपटाप व कम्प्यूटर आदि पर चिपके रहते हैं। इसके कारण युवा व बच्चे खेलकूद व अन्य गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं।

अभिभावक विकास वधवा ने बताया कि कोविड के कारण स्कूल बंद दौरान आनलाइन पढ़ाई हेतु अपने बच्चे को मोबाइल दिया गया था अब बच्चे उस मोबाइल का उपयोग आनलाइन गेम पर दिन भर कर रहे है। खाने पीने में ध्यान नही है। खाते समय मोबाइल देखने से शरीर में खाना नहीं लगता। छीन लेने पर रोना भूखे रहने, ये सब हरकतों से परेशानी होती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags