महासमुंद। खराब नमी मापक मशीन से नमी मापकर बिरकोनी खरीदी केंद्र में किसानों का धान लेने से इंकार किया जा रहा था। खराब मशीन के चलते तीन दिनों में दो दर्जन किसानों के धान वापस हुए। किसानों को अच्छा भला धान मशीन के कारण वापस ले जाना पड़ा, जिससे उनकी श्रम शक्ति और परिवहन में धन की हानि हुई।

इधर शुकवार को मशीन में गड़बड़ी का संदेह कुछ किसानों को हुआ। कहने पर खरीदी केंद्र स्टाफ नहीं माने और खराब मशीन की जांच को सही ठहराते रहे। बाद किसानों ने जिला पंचायत सदस्य अमर अरुण और जुगनू को खबर दी।

दोनों नेता मौके पर पहुंचे। यहां फिर से मशीन से जांच कराई, तब भी नमी की मात्रा अधिक आती रही।

बाद अमर अरुण ने कांपा खरीदी केंद्र से मशीन मंगवाई। इस मशीन की जांच में धान नमी कम बताया, जो धान खरीदी के मानक में थी। तब मशीन खराब होने की बात खरीदी केंद्र ने माना और कांपा से लाई मशीन से जांच कर किसानों के धान खरीदे गए।

अमर व जुगनू ने लगाई फटकार

जिपं सभापति अमर व जुगनू चंद्राकर ने समिति प्रबंधक समेत कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि मॉइश्चर मशीन खराब था तो पिछले तीन दिनों से इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। अमर ने बताया कि जांच में पाया गया कि समिति पदाधिकारियों द्वारा अपने नजदीकी बड़े किसानों के धान को आसानी से पास किया जा रहा था।

तथा छोटे व गरीब किसानों को परेशान किया जा रहा था। उन्होंने इसकी शिकायत एसडीएम, जिला नोडल अधिकारी से की तथा मौके पर उपस्थित होने कहा। जिसके बाद नोडल अधिकारी मौका स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत पत्र कलेक्टर को सौंपी जाएगी।

जांच के दौरान किसानों ने अमर को बताया कि समिति प्रबंधक समय पर कभी आते ही नहीं। जिस पर उन्होंने फटकार लगाते हुए प्रबंधक को समय पर उपस्थित रहने तथा नियमतः किसानों से धान खरीदी के निर्देश दिए।

इन किसानों का धान किया जा रहा था रिजेक्ट

अमर अरुण ने बताया कि किसान तुषार चंद्राकर का 250 कट्टा धान नमी पहले 18.6 बताया गया था, बाद उसमें 14.2 नमी मिला। संदीप चंद्राकर का तीन सौ कट्टा धान नमी 21.2 बताया गया बाद 13.6 मिला। गोवर्धन चंद्राकर 180 कट्टा धान नमी में पहले 20.5 व बाद में 15.3 नमी।

लेमन चंद्राकर का 350 कट्टा धान जिसमें नमी पहले 21.2 बताया गया, बाद 15 फीसद आया। कमल नारायण चंद्राकर का 250 कट्टा धान नमी 17.8 में 13.2 फीसद नमी। शेषनारायण साहू का 150 कट्टा धान में नमी पहले खराब मशीन से 18.9 और सही मशीन से 14 फीसद मिला।

ऐसे ही आठ किसानों का धान में नमी 10 से भी कम था। उनका धान पास किया गया। इससे पूर्व 10 किसानों का धान रिजेक्ट किया जा चुका था। उन सभी किसानों से धान खरीदी करने के निर्देश अमर ने दिए गए।

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कागजों में नापतौल जांच

धान खरीदी की तैयारी को लेकर कलेक्टर डोमन सिंह के रोज बयान आ रहे हैं। जनसपंर्क सब कुछ ठीक बता रहा है, खरीदी व्यवस्था को प्रशासन आंख मूंद कर पारदर्शी बता रहा है। यह भी बता रहा है कि प्रशासन का बेहतर समन्वय और तालमेल है।

फिर बिरकोनी की यह घटना ने प्रशासन के हवाई बयानों की पोल खोलकर रख दिया है। खरीदी शुरू करने से पहले नाप तौल और मशीनों की जांच के फरमान दिए गए थे।

नापतौल विभाग ने कथित तौर पर जांच भी की। बावजूद इस तरह के मामले जांच पर सवाल खड़ा करते हैं। सवाल उठता है कि धान खरीदी में यह कैसा प्रशासन का तालमेल और पारदर्शिता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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