लुतरा। नईदुनिया न्यूज

जश्ने शहीदे आजम कांफ्रेंस की तीन दिनी जलसा में मौलाना गुलाम रब्बानी को सुनने लोग जुटे। उन्होंने कर्बला के बारे में बताया।

लुतरा शरीफ दरगाह के शमां महेफिल हॉल में मुस्लिम जमात की ओर प्रति वर्ष तीन दिनी जश्ने शहीदे आजम कान्फ्रेंस मोहर्रम के सात, आठ ,नौ, तारीख को रात नौ बजे से की गई। इसमें इमाम साहब हसन अशरफी के द्वारा तिलावते कलामें पाक से की गई। इसके बाद लुतरा के मदरसा दारुल उलूम फैजाने इंसान अली के छात्रों द्वारा नाते मुस्तफा पेश की गई। इसके बाद झारखंड से आए मौलाना गुलाम रब्बानी के द्वारा शोहदाऐ करबला के वाकयों का बेहतरीन अंदाज मे पेश की। उन्होंने बताया कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। इसी महीने से नया साल शुरू होता है, लेकिन इस महीने की एक से दस तारीख तक गम मनाया जाता है। इसकी वजह यह है कि इस बीच हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की जंग धर्म की रक्षा के लिए यजीद से चल रही थी। यह जंग इराक के प्रमुख शहर कर्बला में लड़ी गई थी। यजीद अपने सैन्य बल के दम पर हजरत इमाम हुसैन और उनके काफिले पर जुल्म कर रहे थे। उस काफिले में उनके परिवा और कुछ अनुयायियों समेत 72 लोग थे। युद्घ में हजरत इमाम हुसैन ने प्राणों की बलि देना बेहतर समझा, लेकिन यजीद के आगे समर्पण से मना कर दिया। महीने की दसवीं तारीख इसलिए खास बन गई क्योंकि इसी दिन पूरा काफिला शहीद हो जाता है। चलन में इसी दसवीं तारीख को मुहर्रम कहा जाता है। इस्लाम को मानने वाले इस रोज इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए गम को ताजा करते हैं। प्रोग्राम का संचालन मुस्लिम जमात के सचिव अब्दुल वहाब अशरफी ने किया। प्रोग्राम के सफल होने के बाद समापन में मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शेख हमीद,बिस्मिल्लाह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अब्दुल करीम बेग,हाजी शेर मोहम्मद,नूर मोहम्मद,हाजी मोहम्मद सज्जााद , कारी ताहिर आलम,,मोहम्मद कासीम अंसारी,अब्दुल जब्बार,सिराज मेमन,अब्दुल शहनवाज मेमन ,सलीमुद्दीन, राजू खान, इम्तियाज मेमन,इमरान सुफी,अब्दुल हलीम,युनूस रजा,मुस्तफा खान, डॉ.उस्मान गनी आदि मौजूद रहे।