पेंड्रा(नईदुनिया न्यूज)। धनपुर में आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर में आस्था के ज्योतिकलश जगमगा रहे हैं। श्रद्धालुओं द्वारा 165 मनोकामना ज्योति कलश तथा 155 जंवारा कलश की स्थापना कराई गई है। सुबह से शाम तक की दर्शन करने पहुंच रहे हैं। अंचल में पूरी आस्था के साथ भक्ति भाव से नवरात्र पर्व में श्रद्धालु माता की सेवा कर रहे हैं। दुर्गा मंदिर में प्रशासन द्वारा सुरक्षा की चौक चौबंद व्यवस्था की गई है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड मुख्यालय पेंड्रा से उत्तर में सिवनी जाने के रास्ते में पेंड्रा से 14 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग में पुरातात्विक पौराणिक गांव धनपुर स्थित है। यह धनपुर गांव बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग के पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन से 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित है जबकि विकासखंड मुख्यालय मरवाही से ग्राम धनपुर की दूरी 30 किलोमीटर है। धनपुर में जन श्रुति के अनुसार प्राचीन काल में पांडवों ने रतनपुर में रहने के बाद एक वर्ष का अज्ञातवास धनपुर के जंगलों में व्यतीत किया था। इस दौरान उन्होंने लगभग 350 तालाब भी बनाए इसमें से 200 की संख्या में तालाब अभी भी अस्तित्व में है। धनपुर में खोदाई के दौरान अनेक तरह की मूर्तियां एवं निर्माण के अवशेष मिलते रहे हैं। यह शिल्प अविभाजित बिलासपुर जिले में बिखरे जैन कलचुरी हैहैवंशी मूर्ति शिल्प के समकालीन है जो नवमीं, दसवीं शताब्दी की मालूम पड़ता है। धनपुर जैन धर्मावलंबियों के आश्रय का केंद्र होने की बात इससे स्पष्ट है। यहां यत्र तत्र बिखरी जैन मूर्तियों के अवशेष से पता चलता है। प्राचीन काल में धनपुर उत्तरा पथ को दक्षिणा पथ से जोडनी वाला प्रमुख मार्ग रही है। यह मार्ग अंडी, कुड़कई, झाबर, बसंतपुर, सोनबचरवार होकर केंदा, मातिन, लाफा से होता हुआ रतनपुर से जुड़ा हुआ था। यही मार्ग जांजगीर शिवरीनारायण से जुड़ा हुआ है। धनपुर में बेनीबाई ,शहर खेरवा, भस्मासुर नामक स्थल है। यहां पहाड़ी के नीचे आदिशक्ति मां दुर्गा देवी का प्राचीन मंदिर है 20 वर्ष पूर्व तपस्वी बाबा मनु गिरी आए तथा वही देवी मंदिर के ऊपर पहाड़ी में स्थित गुफा में तप करने लगे। उन्होंने धनपुर के देवी स्थान की महत्वता को देखते हुए यहां दुर्गा देवी मंदिर निर्माण का प्रकल्प प्रस्तावित किया इसे सभी लोगों ने स्वीकार करते हुए सहयोग कर मंदिर बनवाया।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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