खम्हरिया (नईदुनिया न्यूज)। रमजान के महीने में एक खास रात है शबे कद्र जंहा इस रात भर इबादत किया गया वही सुबह कब्रिस्तान में जाकर अपने मरहूमों के लिए दुआ किए गए। वही रमजान के महीने में खाने पीने से परहेज का अर्थ केवल प्रतिकात्मक होता है हर इंसान को यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि रोजे का एकमात्र उद्देश्य नहीं है पैगम्बर मुहम्मद साहब ने एक बार कहा था जो मोमिन झूठ से परहेज नहीं करता है उसके बाद खुदा को उसके खाने पीने से परहेज करने की आवश्यकता नहीं है जब कोई इंसान रोजे का पालन करता है तो उसे इस बात पर चिंतन करना चाहिए कि इस एक महीने से खुदा हमसे क्या चाहते हैं रोजा का मतलब है स्वयं को अनैतिकता से बचाना। परहेज केवल खाना पीना छोडना नहीं है बल्कि इस रोजा में झूठ फालतू बात गुनाहों से परहेज करना है साथ ही अल्लाह से दुआ कर अपने गुनाहों से माफी देश प्रदेश में अमन चैन खुशहाली के लिए दुआ मांगे। उक्त बातें दरगाह इंतेजामियां कमेटी के चेयरमैन हाजी सैय्यद अकबर बक्शी ने कही। उन्होंने कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन धारा 144 लागू होने के साथ ही समस्त मस्जिदों के इमाम मुतव्वली हजरात से अपील करते हुए की अलविदा जुमा, ईदुल फितर की नमाज अपने घरों में अदा करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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