मोहम्मद इमरान खान, नारायणपुर। Naryanpur News: अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे की चाल बेहद धीमी है। जिला गठन होने के बाद से अब तक 10 कलेक्टर बदल चुके हैं, लेकिन कुरुषनार का मसाहती सर्वे करने के बाद टीम बासिंग और कुंदला में अटक गई है। 11वें कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पदभार ग्रहण कर सर्वे को पहली प्राथमिकता देने की बात कही है। बता दें कि अबूझमाड़ के रहस्य को बूझने के प्रयास कई बार किए गए, लेकिन हर बार नक्सली फरमान से प्रशासन आगे नहीं बढ़ पाता। माओवादियों का गढ़ कहा जाने वाला जिले का अबूझमाड़ देश का ऐसा इलाका है, जहां 15वीं शताब्दी के बाद पहली बार राजस्व सर्वेक्षण का काम शुरू किया गया है।

जीपीएस और गूगल मैप के दौर में भी अबूझमाड़ में कुल कितने गांवों में किसके पास कितनी जमीन है। चरागाह या सड़कें हैं या नहीं। जीवन के दूसरी जरूरी चीजों की उपलब्धता कैसी है। इसका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। ये गांव कहां हैं या इनकी सरहद कहां है, यह भी पता नहीं है। चार हजार वर्ग किमी इलाके में फैले जिले के अबूझमाड़ में ब्रिटिश सरकार ने 1909 में लगान वसूली के लिए इलाके का सर्वेक्षण शुरू किया था, लेकिन वह अधूरा रह गया। 80 के दशक में नक्सलियों ने इस इलाके में प्रवेश किया और फिर इसे अपना आधार इलाका बना लिया।

विधानसभा में गूंज चुका है मामला

विधानसभा में क्षेत्रीय विधायक चंदन कश्यप के सवाल पर राजस्व मंत्री द्वारा सिर्फ एक गांव कुरूसनार का सर्वे पूर्ण होने की बात बताई गई है। हालांकि जिला प्रशासन 10 गांव का सर्वे करने की बात कई बार कह चुका है। अबूझमाड़ के 236 ग्रामों का सर्वे किया जाना शेष है। अबूझमाड़ क्षेत्र में नियमित राजस्व सर्वेक्षण के स्थान पर मसाहती सर्वे करने की बात कही गई है।

दम तोड़ रहीं सरकारी योजनाएं

सर्वे के अभाव में शासन की योजनाएं यहां दम तोड़ रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि का लाभ सर्वे न होने के कारण ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। कृषि भूमि का नक्शा, खसरा बी-1 नहीं होने के कारण धान, मक्का आदि को समर्थन मूल्य में शासन को नहीं बेच पा रहे हैं। जमीन का रिकार्ड नहीं होने के कारण जमीन की खरीदी-बिक्री गाइडलाइन के अनुसार तय मूल्य पर नहीं की जा सकती है।

बैंक से ऋण भी नहीं मिलता

इस इलाके में कोई किसी की भी जमीन पर कब्जा कर लेता है। दस्तावेज नहीं होने के कारण मामला अदालत में भी नहीं पहुंच पाता है। सर्वे न होने के कारण बैंक से ऋण लेने की भी समस्या है। भूमि संबंधी अभिलेख तैयार नहीं होने से विभिन्न ग्रामों में अघोषित अराजकता की स्थिति है। कमजोर स्थिति वाले परिवारों के सदस्य अपनी भूमि की सुरक्षा के प्रति सदैव चिंतित रहते हैं। भूमि संबंधी विवाद होने की स्थिति में निराकरण के लिए कोई स्पष्ट आधार नहीं होने के कारण निराकरण नहीं होता है।

नक्सल पीड़ितों की जमीन हड़प रहे

नक्सल पीड़ित सैकड़ों परिवार के लोग अपना गांव छोड़कर अन्यत्र रह रहे हैं। रिकॉर्ड के अभाव में उनकी पारिवारिक भूमि अन्य व्यक्तियों द्वारा कब्जा की जा रही है। इस बात की पीड़ा नक्सल पीड़ित परिवार दो दशक से झेल रहे हैं। माड़ के लोग चाहते हैं कि उन्हें उनके जमीन का मालिकाना हक मिले लेकिन सर्वे की धीमी गति से परेशान हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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