नारायणपुर । नईदुनिया प्रतिनिधि। Narayanpur firing case कडेनार कैम्प में जवानों के बीच हुई बखूनी संघर्ष के बाद कैम्प के जवानों का मिज़ाज बदला बदला सा नजर आया। सादगी की मिसाल पेश करने वाले आईटीबीपी के जवान अपने छह साथियों के मौत के बाद उखड़े उखड़े नजर आए। कैम्प के सामने बैरियर में तैनात जवान राहगीरों और मीडिया कर्मियों से बहुत ही तल्ख तरीके से पेश आ रहे थे।

हर आने जाने वाले लोगों से जो बर्ताव किया जा रहा था वह आईटीबीपी के जवानों की गरिमा के अनुरूप नहीं दिखा। जवानों का व्यवहार कैम्प के अंदर चल रहे टेंशन को प्रतीत कर रहा था। अधिकांश जवान अवसाद में नजर आ रहे थे नई दुनिया के द्वारा हेलीपैड की सुरक्षा में तैनात जवान से सामान्य बातचीत किया गया तो उन्होंने कहा सर माफ करिए अभी मैं बात करने की स्थिति में नहीं हूं यह कहते जवान ग्रामीणों को आवाज देते हुए दूसरी छोर की ओर रवाना हो गए । दो पहाड़ियों के बीच नक्सलियों के गढ़ में सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे जवान डिप्रेशन में नजर आ रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि आइटीबीपी के करीब एक सौ दस जवानों के लिए बनाया गया खाना दोपहर को किसी ने नहीं खाया है। कैंप के अंदर चारों तरफ खून के छींटे बिखरे पड़े हुए । आइटीबीपी कैंप के अंदर मीडिया कर्मियों को जाने नहीं दिया गया। यह पहला मौका है जब नक्सल मोर्चे पर तैनात आईटीबीपी के जवानों के द्वारा मीडियाकर्मियों से दूरी बनाई गई।

साथियों को मौत के घाट उतारने वाला रहमान अपने शांत स्वभाव की वजह से अलग से पहचाना जाता था। बताते हैं कि रहमान के द्वारा सुबह नाश्ता करने के बाद छुट्टी में घर जाने की बात कहते अपने मित्र नजीर के साथ कैरम खेलने के बाद सामान पैक किया गया था।

इसी बीच बैरक में दो जवानों से कहासुनी हुई और रहमान ने अपने साथियों का एके-47 उठाकर गोली दागना शुरू कर दिया । इसके बाद रहमान बगल वाले बैरक में गया वहां एक जवान को गोली मारने के बाद वहां से निकलकर करीब 200 मीटर दूर जाकर दो जवानों को गोली मार दिया। बताते हैं कि रहमान के सामने जो आता था आया उसे गोली मारता गया। पांच मिनट के अंदर खूनी संघर्ष में छह जवानों की मौत हो गई ।

Posted By: Hemant Upadhyay

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