मोहम्मद इमरान खान, नारायणपुर। अबूझमाड़ के सबसे दुर्गम इलाके में डीआरजी के 120 जवानों ने 80 घंटे के ऑपरेशन में पांच नक्सलियों को ढेर कर दिया है। पुलिस और नक्सली मुठभेड़ में डीआरजी का एक जवान शहीद हो गया है। वहीं दूसरे जवान को रामकृष्ण केयर अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। नक्सलियों के आधार इलाके में सुरक्षाबल के जवानों के द्वारा पहली बार इतनी लंबी लड़ाई लड़ी गई है।

ऑपरेशन में शामिल जवानों के पैरों में छाले पड़ गए है। दो दिन के राशन में तीन दिन तक चलते हुए नक्सलियों से मुकाबला करते हुए बिस्किट और मिक्‍चर खाकर लौटे हैं। अबूझमाड़ के उफनती नदी और नालों को पार करते डीआरजी और एसटीएफ के जवान रविवार की सुबह जिला मुख्यालय पहुंच गए है। नक्सलियों के ट्रेडिंग के को ध्वस्त करने के बाद जवानों ने बड़ी संख्या में नक्सलियों का गोला बारूद दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद किया है।

एसपी कार्यालय में पत्रकार वार्ता में बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि अबूझमाड़ मैं नक्सलियों के मिलिट्री कंपनी नंबर है का ट्रेनिंग के संचालित की जाने की सूचना पर अकाबेडा कैम्प से डीआरजी की टीम को ओकपाड़,कुतुल,कोडेनार,धुरबेड़ा ,गुमरका की ओर रवाना किया था ।

शनिवार की सुबह गुमरका और धुरबेड़ा के जंगल में नक्सलियों के द्वारा जवानों पर फायरिंग किया गया। जिसकी जवाबी कार्रवाई में चार पुरुष समेत एक महिला नक्सली मारी गई है । उन्होंने बताया कि नक्सलियों को ढेर करने के बाद डीआरजी और एसटीएफ के जवान 60 किलोमीटर पैदल चल मुख्यालय लौटे हैं।

इस दौरान नक्सलियों के द्वारा कई बार अटैक करने का प्रयास किया गया लेकिन जवानों की सूझबूझ और सतर्कता से नक्सली कामयाब नहीं हो पाए । आईजी श्री सिंहा ने बताया कि नक्सली मुठभेड़ में शामिल जवानों को दो लाख रुपये का नगद इनाम दिया गया है। पत्रवार्ता के दौरान एसपी मोहित गर्ग समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे ।

तीन बार बनाया अस्थाई हेलीपैड

गुमरका में नक्सलियों को ढेर करने के बाद डीआरजी के जवान अपने घायल साथियों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए पीएचक्यू की मदद का इंतजार करते रहे। मुठभेड़ के बाद 5 किलोमीटर दूर निकलने के बाद जवानों ने एसपी मोहित गर्ग से सेटेलाइट फोन से संपर्क किया और अपने घायल जवानों की बारे में सूचना देकर हेलीकॉप्टर की मदद मांगी। जिसके बाद एसपी के निर्देश हैं जवानों ने पहाड़ी के पास पेंदा खेती की जगह में अस्थाई हेलीपैड बनाकर अपने उच्च अधिकारियों को सूचित किया।

जिसके बाद हेलीकॉप्टर से मदद मिलने की आश्वासन मिलने के बाद जवान पूरे इलाके में फैल गए और हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे । यहाँ मदद नहीं मिलने की सूचना के बाद दूसरे पॉइंट पर गुमरका गांव के पास पहुंचे और वहां पर दूसरा हेलीपैड बनाकर हेलीकॉप्टर आने का इंतजार किया ।यहां भी निराशा लगने के बाद डीआरजी के जवान पैदल घायल जवानों के साथ मृत नक्सलियों के शव को लेकर आकाबेड़ा के गोटिंग पारा तक पहुंचे और यहां पर तीसरा अस्थाई हेलीपैड बनाकर हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे ।यहां पर बारिश की वजह से हेलीकॉप्टर की लैडिंग नहीं हो पाने की जानकारी मिलने के बाद जवान पूरी ऊर्जा के साथ नक्सली चुनौतियों का सामना करते हुए जिला मुख्यालय लौट आए।

नक्सली खा गए धोखा

अबूझमाड़ के माड़ डिवीजन के सबसे सेफ जोन में बरसते पानी में नक्सलियों के ट्रेनिंग सेंटर में फोर्स के पहुंचने की भनक नक्सलियों को काफी देर तक नहीं लग पाई थी। सूत्र बताते हैं कि ट्रेनिंग कैम्प के पास फोर्स के जवान एकदम करीब पहुंच गए थे । सुबह की धुंध में नक्सलियों के संतरी धोखा खा गए थे । डीआरजी के जवानों को पास से देखने के बाद भी उन्हें अपना साथी समझ रहे थे।

इसी दौरान कुछ नक्सलियों ने जवानों को पास से देखने के बाद अपना आपा खो दिया और फायरिंग करने लगे। जिसकी जद में आने से डीआरजी के राजू नेताम और समारू कोटा को गोली लग गई । इस बीच डीआरजी के 4 टुकड़ियों में फैले 120 जवान मौके पर पहुंच गए और नक्सलियों के कैम्प को ध्वस्त करते हुए 5 लोगों को मार गिराया। डीआरजी के जवानों के साथ पांच महिला लड़ाकू भी सर्च ऑपरेशन में गई हुई थी जिनके द्वारा बड़ी बहादुरी से नक्सलियों से मुकाबला किया गया ।