मोहम्मद इमरान खान

नारायणपुर। अबूझमाड़ के किसान इस बार भी समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाएंगे। इसकी वजह यह है कि 44 वर्ग किमी में फैले अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में आदिम जीवन बिता रहे इन किसानों में से किसी के भी पास भूमि का पट्टा नहीं है। भूमि पर मालिकाना हक न होने से अबुझमाड़िया किसानों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करती है। इस योजना का जोर शोर से प्रचार भी किया जाता है पर जिस अति पिछड़े समुदाय को इस योजना की सबसे ज्यादा जरूरत है वहां तक योजना पहुंच ही नहीं पाती है। अबूझमाड़ का राजस्व सर्वे करने के प्रयास कई बार किए गए पर सफलता नहीं मिली। मुगल बादशाह अकबर यहां का सर्वे नहीं करा पाए थे। 1909 में अंग्रेजों ने भी प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाए। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार ने इसरो की मदद से सेटेलाइट सर्वे तो कर लिया है पर दुर्गम जंगलों में नदी, पहाड़ पार कर मीलों पैदल चलने वाले आदिवासियों के गांव तक भौतिक सत्यापन के लिए टीम भेजना संभव नहीं हो रहा है। बीते तीन दशक से इन जंगलों में नक्सलियों का कब्जा है। इससे यहां चुनौती और बढ़ गई है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों को पंजीयन कराना होता है। अबुझमाड़िया सामुदायिक चल खेती करते हैं। जमीन का मालिकाना हक नहीं है तो पंजीयन कैसे हो। बीते कुछ वर्षों में करीब एक दर्जन गांवों तक सरकार की पकड़ बनी है। गत वर्ष 162 किसानों ने धान बेचा था। उनके पंजीयन का नवीकरण किया गया है। इस साल 60 अन्य किसानों का भी पंजीयन कराया गया है। इस तरह इस बार कुल मिलाकर 212 किसान ही धान बेच पाएंगे। इन किसानों को माड़ के ब्लॉक मुख्यालय ओरछा में धान बेचने की अनुमति है जबकि पंजीकृत किसानों में ज्यादातर ऐसे हैं जिनके लिए जिला मुख्यालय की दूरी ओरछा से कम है। बासिंग, कुरूषनार इलाके के किसानों को ओरछा जाने के लिए 120 किमी का चक्कर काटना पड़ता है। कलेक्टर अभिजीत सिंह इन किसानों को नारायणपुर से लिंक करने के लिए पत्र लिख चुके हैं पर कोई जवाब नहीं आया है। स्थानीय विधायक व छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप ने माड़ के किसानों के लिए अलग व्यवस्था करने के लिए सरकार को पत्र लिखा पर जवाब नहीं आया। अब जबकि खरीदी शुरू होने में महज एक सप्ताह ही बाकी है अबूझमाड़ के किसानों में मायूसी दिख रही है।

रिकॉर्ड में 13 हजार किसान

कृषि विभाग के रिकॉर्ड में अबूझमाड़ में 13 हजार किसान हैं। उपसंचालक कृषि से मिली जानकारी के अनुसार अबूझमाड़ में अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों की संख्या 162 है। वहीं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 11 हजार 458 किसान हैं। एक हजार 653 किसान अन्य जातियों के हैं। इन सभी को मिलाकर माड़ में 13 हजार 273 किसान रिकार्ड में दर्ज हैं। माड़ में धान, मक्का, उड़द, चना, गेंहू की पैदावार की जा रही है।

हर साल लाखों खर्च

जिला प्रशासन और रामकृष्ण मिशन आश्रम द्वारा अबूझमाड़ के किसानों की आय बढ़ाने के लिए हर साल केंद्रीय और खनिज निधि से लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। अबूझमाड़ के कुरुषनार और बासिंग के किसानों की जमीन पर एक करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च कर आधुनिक तरीके से खेती किसानी करने के तौर-तरीकों के साथ कृषि उपकरण और बीज का वितरण किया गया है।

वर्जन

बासिंग और कुरुषनार इलाके के किसानों को 120 किमी दूर जाना न पड़े इसलिए सेंटर को नारायणपुर में लिंक करने के लिए राज्य शासन को पत्र भेजा गया था लेकिन अभी तक लिंक नहीं हो पाया है। ओरछा धान खरीदी केंद्र में पंजीयन शुरू करने के बाद 60 नए किसानों ने पंजीयन कराने के लिए फार्म भरा था। जिनका पंजीयन कर दिया गया है।

- अभिजीत सिंह, कलेक्टर नारायणपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस