रायगढ़ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल एक दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है। कोविड 19 की वजह से जिले में व्यापक स्तर पर एड्स के प्रति के लिए जागरूकता कार्यक्रम में कमी आई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने ब्लाक स्तर पर छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित कर लोगो को जागरूक किया है। करने में लगा हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक चालू साल में कोरोना संक्रमण के समय में भी 14,400 से अधिक लोगों की काउंसलिंग की जा चुकी है और इनमें से सभी का टेस्ट कराया गया है जिनमें से 34 लोगों का रिजल्ट पाजिटिव आया और सभी को लिंक कर दिया गया है। इस बार विश्व एड्स दिवस 2021 की थीम 'असमानताओं को समाप्त करें, एड्स खत्म करें' है। वही काउंसिलिंग में आने वाले सभी लोगों को यह बताया गया कि एड्स के प्रति जागरूकता ही एकमात्र बचाव है क्योंकि एड्स की बीमारी का काफी देर बाद पता चलता है और मरीज भी एचआईवी टेस्ट के प्रति सजग नहीं रहते, इसलिए अन्य बीमारी का भ्रम बना रहता है। बचाव का सबसे पहला चरण एड्स के लक्षण पहचानना है। एड्स का पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम होता है।

कोरोना काल में घबराएं नहीं लोगः डा. टोंडर

जिला एड्स नियंत्रण समिति के नोडल अधिकारी डा टीके टोंडर ने बताया एड्स के प्रति लोगों को जागरुक किया जा रहा है। एड्स का बचाव ही इसका इलाज है। सरकार व विभाग इसके रोकथाम के लिए बेहद सजग है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पुरुषों के लिए कंडोम की व्यवस्था भी की गई है। असुरक्षित यौन संबंध से बचना है और सजग रहना है। सभी जगहों पर इसकी जांच की जाती है। संक्रमित मरीजों को मुफ्त दवा दी जा रही है। डा टोंडर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में भी एड्स नियंत्रण की पूरी टीम सक्रिय है। हम काउंसिलिंग के सदैव तैयार हैं लोगों को किसी भी प्रकार से हिचकना नहीं है।

इस साल मिले 34 मरीज

जिला एड्स नियंत्रण समिति से मिले आंकड़ों के अनुसार बीते 11 सालों में जिले में 403 एड्स के मरीज मिले हैं। इनमें से 311 लोगों को लिंक कराया जा सका है यानी दवा चालू हो गई है। सबसे पहले आईसीटीसी में रजिस्ट्रेशन होता है फिर एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी ) लिंक बनता है। मेन एआरटी बनने के बाद उसे छह महीने की दवा मिलती है।

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