तमनार । नईदुनिया न्यूज

केलो कोयलांचल आदिवासी बाहुल्य तहसील तमनार के बालक छात्रावास में स्वामी विवेकानंद जी की 157 वीं जयंती शिक्षक नीलाम्बर पटनायक, दुलेन्द्र पटेल,जीतराम बारिक अन्य अतिथियों एवं एबीवीपी कार्यकर्ताओ एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति में मनाया गया। सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद जी की छायाचित्र पर पूजा अचर्जना दीप प्रज्वलन कर शुभारम्भ किया गया। युगपुरुष, वेदांत दर्शन के पुरोधा, मातृभूमि के उपासक, विरले कर्मयोगी, तूफानी हिन्दू साधु, करोड़ों युवाओं के प्रेरणाश्रोत व प्रेरणापुंज स्वामी विवेकानंद के जीवनी पर परिषद एवं अतिथियों द्वारा बच्चो को संबोधित किया गया॥ मुख्य अतिथि शिक्षक नीलाम्बर पटनायक ने कहाकि स्वामी विवेकानंद की जन्म दिवस 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। युवाओं के प्रेरणाोितस्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ।उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे बाल्यकाल में ही वेद पुराण गीता आध्यात्मिक, वेदांत दर्शन में महारत हासिल था। 1893 शिकागो अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म महासभा मे भारत का प्रतिनिधित्व किये। भारतीयों पर अंग्रेजीयत हावी हो रही थी तभी स्वामी विवेकानंद ने जन्म लेकर न केवल हिन्दू धर्म को अपना गौरव लौटाया अपितु विश्व फलक पर भारतीय संस्कृति व सभ्यता का परचम भी लहराया।उनके आदर्श संस्कार को आत्मसात करते उनके बताए मार्ग पर चलकर राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बने।नशा से दूर रहने की बात कही गई। पत्रकार दुलेन्द्र पटेल ने युवाओ के प्रेरणाश्रोत स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलकर तन मन धन से समर्पित होकर भारतमाता राष्ट्र की सेवा करने बात कही। उनके संदेश उठो जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।उन्होंने आगे कहांकि घड़ी की तरह समय का सदुपयोग करते संयमित सांस्कारिक होकर कार्य, क्रियाकलाप, प्रशिक्षण, आचरण, ईमानदारी इन पांचों को जीवन में आत्मसात कर समाज राष्ट्र सेवा करने हेतु प्रोत्साहित किये।

Posted By: Nai Dunia News Network

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