रायगढ़। शासन की कार्य योजना को चलाने के लिए जिला प्रशासन के पास कोई भी फंड नहीं है क्योंकि जिस योजनाओं को प्रस्ताव बनाकर तैयार किया जा रहा है । वह भी फंड के अभाव में अब अधर में लटक रहा है, इसका उदाहरण रायगढ़ सेठ किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय का एक बिल्डिंग है। जो महिला मरीज के लिए था। जिसे जर्जर होने के कारण नए भवन बनाने का प्रस्ताव बनाया भेजा गया था। लेकिन अब यह फंड के अभाव में ठंडे बस्ते में चला गया जिसमें अब फिर से लीपापोती करते हुए मरम्रमत कर फिर से चलाने की कवायद की जाएगी।

पिछले कई सालों से जिला अस्पताल के भवन में मेडिकल कालेज अस्पताल संचालित हो रहा था, जिससे यहां 350 बेड के साथ अस्पताल चल रहा था, लेकिन मेडिकल कालेज के अलग होते ही यहां बेडों की संख्या काफी कम हो गई। इसके पीछे कारण यह है कि जिला अस्पताल का भवन काफी पुराना होने के कारण कई वार्डो में सीपेज होने के कारण प्लास्टर गिरने लगा था, जिससे कई बार मरीज भी घायल हो गए थे। जिससे स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी जानकारी शासन को भेजी गई थी। जिससे पीडब्ल्यूडी द्वारा उक्त भवन का जांच कराया गया, जिसमें पूरी भवन को जर्जर घोषित किया गया था, जिससे अस्पताल के कुछ हिस्से में नई बिल्डिंग बनाने की तैयारी चल रही थी। साथ ही इसके लिए सीजीएमएससी द्वारा कई बार सर्वे भी किया गया और स्टीमेट भी बनाकर भेजा गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका। जिसके चलते कम जगह में ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, लेकिन लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए जिला अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाने की जरूरत पड़ रही है, लेकिन वार्ड नहीं होने के कारण दिकक्तों का सामना करना पड़ रहा है।

मरम्मत कर चलाने की तैयारी

विभागीय सूत्रों की मानें तो अब जिला अस्पताल में नए भवन का निर्माण नहीं होगा, इसकी वजह है कि फिलहाल शासन के पास फंड नहीं है, जिसके चलते नया भवन नहीं बन पा रहा है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि भवन के मरम्मत के लिए स्टीमेट तैयार किया जा रहा है, जिसके बाद शासन को भेज जाएगा। जिसके बार मरम्मत कार्य शुरू होगा।

बिस्तर और सेटअप की दरकार

मेडिकल कालेज शुरू होने के बाद भी हर दिन जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अभी तक यहां 100 बेड संचालित हो रहा था, लेकिन लगातार मरीज बढ़ने के कारण अब बेडों की संख्या 150 हो गई है। इसके बाद भी बेड कम पड़ रहा है। लेकिन समस्या यह है कि जिला अस्पताल के कई वार्ड जर्जर होने के कारण उसे बंद कर दिया गया है। ऐसे में जब तक उसका सुधार कार्य नहीं होगा, तब तक वार्ड शुरू करना संभव नहीं है।

वर्जन

फंड के अभाव में जिला अस्पताल का नया भवन का मामला लटक गया है। ऐसे में फिलहाल मरम्मत कार्य कराया जाएगा ताकि बेडों की संख्या बढाई जा सके। वर्तमान में यहां 140 बेड संचालित हो रहा है, लेकिन मरीजों के हिसाब से कम पड़ रहा है।

डा. आरएन मंडावी, सिविल सर्जन, केजीएच

Posted By: Yogeshwar Sharma

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