रायगढ़ । कोरोना काल मे आक्सीजन की महत्ता को पौधे कर रूप सचेत करवा दिया अेसे में अब 10 जून को वट सावित्री के अवसर पर सुहागिनो द्वारा पति व बच्चों के लिए लंबी उम्र की मंगलकामना करेंगे साथ ही हरियाली लाने आक्सीजन की प्रचुरता के लिए नईदुनिया के अभियान वट वृक्ष दे वरदान के तहत बरगद का पौध रोपेंगे। नईदुनिया से चर्चा करने के दौरान कई महिलाओं ने बताया कि भारतीय संस्कृति और यह अभियान पर्यावरण के प्रति लोगो को अलख जाएगा कोरोना काल मे जिस तरह से आक्सीजन की किल्लत हुई अगर थोड़ा मनन कर तो यह गम्भीर परिस्थितियों को उतपन्न करता है, इस वजह से अध्यात्म के बाद अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करने की बात कहे है।

भारतीय संस्कृति में वृक्षों का बहुत महत्व है,वट सावित्री का यह त्योहार हमें वट वृक्ष की महत्ता समझाता है, एक ओर यह त्योहार हमें परंपरा से जोड़ता है तो वहीं दूसरी ओर प्रकृति से भी अभिभूत करवाता है। मैं नईदुनिया के अभियान से संकल्पित हूं। इस दिन वट वृक्ष का रोपण करूंगी जिसमे मेरे पूरे परिवार की भागीदारी होगी। इसके अलावा परिवार से लेकर आसपड़ोस के सभी अन्य लोगो को भी प्रेरित करूंगी।

रेखा केसरी, गृहिणी

इस कोरोना के दौर ने हमें प्रकृति के प्रति सजग कर दिया है,इस दौर में हमने प्राण वायु के स्पर्श को समझा है,वृक्षों के प्रति हमारी आस्था आज की नहीं यह तो पुरातन काल से चली आ रही है,परंतु अज्ञानतावश मनुष्य अपनी ही प्राणवायु पर प्रहार कर बैठा है,परंतु एक कहावत है,जब जागो तभी सवेरा, और इसी नये सवेरे की उम्मीद में हम इस वर्ष वट सावित्री का पूजन कर एक वटवृक्ष लगाएंगे और संकल्प लेंगे की उसे सहेजने की जिम्मेदारी लेंगे,परंपरा व प्रकृति की पूजा का यह पर्व हर बाधा को नष्ट करे यही कामना है।

कविता शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष नप घरघोड़ा

आस्था के इस पर्व को प्रकृति से जोड़ने के लिए मैं नईदुनिया को धन्यवाद देती हूं, मैं एक शिक्षिका हूं और समाज के प्रति हर एक अच्छी सोच और कार्य को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए प्रंबध हूं, मैं इस पावन वट सावित्री पर्व पर अपनी ओर से प्रकृति के वरदान रूपी यह वट वृक्ष जरूर लगाऊँगी।यह पावन वृक्ष सदैव हमारी रक्षा करते हैं,हमारा दायित्व है कि हम भी इनकी रक्षा करें।

सुधा पांडे, शिक्षिका कन्या शाला घरघोड़ा

वृक्ष हमारी संस्कृति आस्तित्व का अहम हिस्सा है। विभिन्न आयोजन में हम पेड़ पौधे की पूजा पाठ कर इनके महत्व का आने वाले पीढ़ी के लिए संदेश दिया है, महिला हो या पुरूष युवा हो या किशोर या फिर बालक बालिकाएं सभी को पौधा लगाना चाहिए और ध्यान इस बात का रखना चाहिए कि वह बड़ा होने के बाद काटा न जाए। यदि वृक्ष नही होंगे तो हम कैसे पूजा अर्चना करेंगे ।बरगद का पेड़ हमारे लिए बहोत उपयोगी है इस लिए वट सावित्री के दिन इसका पौध जरूरी लगाउंगी।

पुष्पांजलि दासे, रायगढ़ शिक्षिका बड़े भंडार स्कूल

कोरोना काल ने हमे प्र-ति की कई अहम सीख दी है।पर्यावरण में प्रचुर आक्सीजन हो इसके लिए मैं वट सावित्री के दिन नईदुनिया के अभियान से जुड़कर बरगद का पौधा लगाउंगी। इस बार यह दिन बेहद खास होगा क्योंकि अध्यात्म को हम प्र-ति के लिए कुछ कर पाएंगे। मेरा मानना है कि प्र-ति है तो हम है नही तो कुछ नही होगा इस संसार में। सभी को अपनी सहभागिता निभानी चाहिए

लक्ष्मी अग्रवाल,गृहणी रायगढ़

जीवन मे आक्सीजन देने वाले पौधे हमारे लिए सबसे अहम है। वट वृक्ष धार्मिक समाजिक दृष्टिकोण से काफी अहम है, इसके अलावा पर्यावरण के लीए भी काफी महत्त्वपूर्ण है।वट सावित्री के दिन वट वृक्ष लगाकर उसे बचाने का नईदुनिया अभियान के तहत बचाने का संकल्प लूंगी। लोगो को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए इस तरह के अभियान से जुड़ना चाहिए और जितना ज्यादा हो सके उतना अधिक पौधे लगाना चाहिए प्रशासन को भी पौधे को बचाने के लिए कुछ करना चाहिए।

कविता बेरीवाल,दिव्य शक्ति सामाजिक संस्था प्रमुख

वट सावित्री के दिन पति के दीर्घायु के लिए व्रत रखने व पूजा करने की पंम्परा आदिकाल से चली आ रही है। वर्तमान दौर में बरगद का पौध बहोत कम नजर आता है। कई बार हमें यह पौधे को दूसरे तीसरे मोहल्ले जाकर ढूंढना पड़ता है। नईदुनिया द्वारा जो अभियान चलाया जा रहा है उसमें मेरी सहभागिता रहेगी। इसके लिए मैं विधिवत पूजा अर्चना करने के पश्चात एक बरगद का पौध की व्यवस्था कर उसे समुचित स्थान पर रोपुंगी।

मधु श्रीवास्तव, गृहणी रायगढ़

मेरी शादी को दो साल हुआ है यह मेरी दूसरी वट सावित्री पूजा होगी। पूजा अर्चना की परंपरा हमारे परिवार में रीति के मुताबिक चली आ रही है यह सच है कि बरगद का पेड़ 10 गुना अधिक अन्य पेड़ की तुलना में देती है। कोरोना के चलते पर्यावरण व प्र-ति कितनी महत्वपूर्ण है इसे देखते हुए इस बार मैं नईदुनिया अखबार के अभियान से जुड़कर बरगद का पौध लगाउंगी और दूसरे को भी

दीप्ति सोनकर, गृहणी रायगढ़

Posted By: Nai Dunia News Network

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