रायगढ़ (नईदुनिया प्रतिनिधि )। अग्र संघ के चुनाव को लेकर उठे विवाद का सुखद पटाक्षेप समाजिक बैठक में हुआ। इस वर्ष महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह के संयोजक सुरेश गोयल व अध्यक्ष अनूप रतेरिया के आह्वान पर होटल पुष्पक में समाज की बैठक हुई। इसमें समाज के वरिष्ठ जन, महिलाए व युवा भारी संख्या में शामिल हुए। सभी ने समवेत स्वर में जयंती समारोह को मिलजुलकर एका के साथ धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। साथ ही मंचासीन अग्रजनों ने समवेत स्वर में कहा कि महाराजा अग्रसेन के वंशज सामाजिक एका हेतु तन मन सहित धन के समर्पण के लिए पहचाने जाने का आह्वान भी किए।

गौरतलब है कि बीते दिन संघ चुनाव को लेकर जमकर विवाद हुआ था। इसी को सुलझाने के लिए शहर के होटल में समाजिक बैठक रखी गई थी। बैठक में समाज के सभी वरिष्ठ मैं अपनी अपनी बातें रखें।बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान इस बात पर भी नाराजगी जताई गई कि कोरोना काल के पूर्व राम बाग में चुनाव की अप्रिय स्थिति को टालने हेतु समाज के वरिष्ठ जनों ने लिखित समझौता कराया था जिसमे जिसमे वर्तमान अध्यक्ष मुकेश मित्तल का कार्यकाल आगामी सात माह तक जारी रखने पर सहमति बनी। साथ ही जयंती के आयोजन हेतु संयोजक सुरेश गोयल व अध्यक्ष अनूप रतेरिया को जवाबदारी दी गई थी, लिखित सहमति बनाई गई कि मुकेश मित्तल के बाद सुरेश गोयल की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति होगी ।

समाज के वरिष्ठ जनों के द्वारा लिखित समझौते का सम्मान दोनो पक्षों ने किया। वही अब समझौते में अनुसार मुकेश मित्तल अध्यक्ष बने रहे और सुरेश गोयल एवं अनूप रतेरिया के नेतृत्व में कोरोना काल के दौरान भी नियमों आन लाइन जयंती का सफल आयोजन किया गया। सेवा संघ के अगले अध्यक्ष के चयन हेतु लिखित समझौते के अनुसार अध्यक्ष बनाने की बजाय बिना नियमों का पालन किए आनन फानन में हड़बड़ी में चुनाव कराने का निर्णय थोप दिया गया। अधिकांश सदस्य चुनाव के पक्ष में नहीं थे ।राम बाग में लिए गए निर्णय को नही मानना सीधे तौर पर लिखित किए गए समझौते का उलंघन है ।वही अग्र समाज के लिए वचन बद्घत्ता सबसे बड;ी संपति मानी जाती है। लिखित समझौते का पालन नहीं करने से समाज में आपसी विश्वास का संकट उत्पन्न हो गया। अग्रजनो को अपने वचन का धनी माना जाता है।

राजा हरीश चंद्र की तरह सत्य पर अडिग रहने का कार्य अग्र वंशी ही कर सकते है। अग्र समाज की वचन बद्घता सर्व समाज के लिए अनूठी मिशाल है। राम बाग के लिखित फैसले का सम्मान नही करना समाज की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है । सेवा संघ से जुड़े सदस्यो ने विवाद की स्थिति को टालने लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा व बदलाव के लिए चुनाव के निर्णय को भी स्वीकार के लिया लेकिन चुनाव की प्रक्रिया को इतना दुरूह बना दिया गया कि सदस्यो का अक्रोशित होना स्वाभाविक था । सेवा संघ द्वारा जयंती मनाए जाने के एकतरफा निर्णय ने पुनः समाज में आक्रोश की स्थिति पैदा कर दी न विधि विरुद्घ व मनमाने निर्णय आक्रोशि स्वाभाविक था इसलिए होटल पुष्पक में आयोजित बैठक के दौरान सभी पक्षों को साथ लेकर धूम धाम से भव्य रूप से जयंती मनाने का निर्णय लिया गया ।

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