रायगढ़। जिले में एक अनोखी ग्राम पंचायत है, जहां ग्रामीणों की जरूरत व काम के अनुसार तहसील बदल जाती है। तमनार का नूनदरहा व इसके आश्रित गांव एक नहीं बल्कि तीन-तीन तहसीलों पर निर्भर हैं और तमनार के अलावा इस पंचायत का घरघोड़ा व लैलूंगा ब्लाक से भी नाता जुड़ा हुआ है।

शहर में वार्डों के परिसीमन में विसंगति की तरह पंचायतों में भी इस तरह की गड़बड़ी है लेकिन जिले में एक ऐसी पंचायत भी है, जहां ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार सरकारी दस्तावेजों में तहसील का अलग अलग जिक्र करना होता है। दरअसल मामला नूनदरहा ग्राम पंचायत का है।

जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर नूनदरहा ग्राम पंचायत वैसे तो तमनार जनपद पंचायत का इलाका है। नूनदरहा पंचायत का आश्रित गांव केराखोल है। पंचायत में ग्रामीणों की पेंशन, पीडीएस में शिकायत या आवेदन,पीएम आवास एवं पंचायत से जुड़े दूसरे सरकारी कार्यों के लिए गांव के लोग तमनार जनपद पर निर्भर है लेकिन गांव में जब बात लॉ एंड आर्डर की आती है तो पुलिस में किसी तरह की शिकायत करने के लिए लोगों को तमनार नहीं बल्कि घरघोड़ा पुलिस थाना जाना होता है। जो कि तहसील मुख्यालय है।

इसी तरह चुनाव की बारी आती है तो मतदाता सूची में नाम जोड़वाने, विलोपन एवं किसी तरह के अपील निपटारे के लिए ग्रामीणों को लैलूंगा तहसील की शरण में जाना होता है। परिसीमन में यह गांव लैलूंगा विधानसभा के संसदीय क्षेत्र में आता है। इस वजह से चुनाव के वक्त गांव वाले निर्वाचन से जुड़े किसी काम के लिए लैलूंगा तहसील जाते हैं।

गांव के ही एनके राठिया बताते हैं कि एक की जगह तीन तहसीलों से जुड़े रहना थोड़ा अव्यवहारिक तो है लेकिन गांव वालों को अब आदत हो गई है। गांव की वृद्ध महिला सुमित्रा निषाद बताती हैं कि तमनार की अपेक्षा घरघोड़ा नजदीक है, इसलिए गांव का संबंधित थाना इसे बना दिया गया था। तब से आज तक ऐसा ही चल रहा है।

सर्वाधिक मतदान का है रिकार्ड

अनोखी विसंगति होने के बाद भी इस पंचायत के नाम पर रिकार्डतोड़ वोटिंग होने तमगा है। लोकसभा में महीने भर पहले मतदान हुआ तो नूनदरहा के आश्रित गांव केराखोल में कुल 268 मतदाताओं में से 266 ने अपने वोट दिए थे। प्रतिशत के लिहाज से यह करीब 99.25 प्रतिशत होता है। जो कि रायगढ़ लोकसभा के सभी 8 विधानसभाओं के मतदान केन्द्रों में सर्वाधिक था।

अधिग्रहण से हो रही परेशानी

गांव से रेल कारीडोर के लिए जमीन अधिग्रहित की गई है। इसमें पूरक के जो प्रकरण बनाए गए थे। उसमें ग्रामीणों को मुआवजा नहीं मिला है। अधिग्रहण के लिए मुआवजा निर्धारण एवं सरकारी प्रक्रिया पूरी करने की बारी आई तो ग्रामीणों को तमनार, घरघोड़ा एवं लैलूंगा के भी चक्कर लगाने पड़ गए थे और वोटर आईडी से लेकर दूसरे दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़े थे।

नूनदरहा पंचायत का नाता तमनार, लैलूंगा एवं घरघोड़ा से भी जुड़ा हुआ है। थोड़ा अजीब है लेकिन ग्रामीणों को अब आदत हो गई है। पंचायत के आति गांव केराखोल में तो इस बार लोकसभा चुनाव में रिकार्डतोड़ 99.25 प्रतिशत मतदान हुआ था। - ललिता राठिया, सरपंच नूनदरहा