रायगढ़( नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर की सड़कों के ख़स्ताहाल होने की वजह से साल भर आवागमन करने वाले लोगो को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है । जिसमें लोगो दुर्घटना में जान भी आए दिन गवां कर इसकी कीमत अदायगी करनी पड़ती है। आलम यह है कि समस्या बारिश में विकराल हो जाती है सड़के गड्ढे में या फिर गढ्ढे सड़क में है इसका अंदाजा लगा पाना कठिन हो जाता है। वही इन दिनों कोतरारोड बाईपास,ढिमरापुर, रायगढ़ घरघोडा, गेरवानी रोड रायगढ़ ओड़िसा ,रायगढ़ सारंगढ नेशनल हाइवे में बने गढ्ढे एवं धूल के गुब्बार ने परेशानियों में डालते हुए जानलेवा बन रहे है।

जिले की सड़कों का हाल बेहाल है जिसमें शहर के अंदर हो या शहर से बाहर निकलने वाली सड़क बदहाली को बयां कर रहे है। बदहाली की मार नेशनल हाइवे कोतरारोड से ढिमरापुर उर्दना मार्ग, सारंगढ बाईपास के अलावा छातामुड़ा से ओड़िसा, व रायगढ़ -घरघोड़ा मार्ग भी शुमार है। वही सडक़ें खराब होने के कारण बरसात से सडक़ पूरी तरह से कीचडय़ुक्त हो गया गया था। ऐसे में अब बरसात के थमते ही कीचड़ सूखकर धूल में तब्दील हो गया है। सड़क के किनारे व सड़क में धूल व राखड़ के साथ छोटे बड़े गढ्ढो की वजह से सडक़ों से भारी वाहनों के गुजरते ही धूल के गुब्बार से छोटे वाहन एवं दुपहिया चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें बाइक सवार को दुर्घटनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है। सडक़ों पर उठने वाले धूल के गुब्बार के कारण दुर्घटनाओं की भी आशंका बढ़ गई है। क्योंकि सडक़ों से उठने वाले धूल से बचने ज्यादातर भारी वाहन चालक ओवरटेक करने के चक्कर में गाड़ी तेज चलाते हैं, जिससे छोटे वाहन सडक़ों में बने गड्ढों के कारण अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं, इस कारण जिले में दुर्घटनाओं का ग्राफी भी तेजी से बढ़ रहा है जिसका जीता जागता प्रमाण आये दिन छोटी बड़ी सड़क दुघर्टना से हो रहा है।

शहर के बाहर कोतरारोड बाईपास ढिमरापुर का हाल बेहाल

ढिमरापुर से घरघोड़ा मार्ग तथा ढिमरापुर से सीएमओं तिराहा जिंदल मार्ग, सारंगढ बाईपास, कोतरारोड बाईपास सबसे ज्यादा जर्जर हालत में है। वजह बढ़ गया है। इस मार्ग में बारिश के दिनों में कीचड़ के चलते परेशानी होती है, अब बारिश बंद होते ही धूल से दो-चार होना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा बाइक चालक प्रभावित

नेशनल सडक़ें जर्जर होने के कारण बाइक चालकों को ज्यादा दिक्कत हो रही है, क्योंकि जिले के चोरों ओर उद्योग जगत खुल जाने की वजह से अधिकांश सडक़ों पर हमेशा भारी वाहनों का दबाव रहता है। धूल व सडक़ें खराब होने के कारण और गाहे बगाहे किसी अनहोनी का शिकार हो जाते है। जबकि बड़े वाहनधारी शीशे को बंद करके किसी तरह खुद को सुरक्षित करते है।

रायगढ़ से घरघोड़ा धरमजयगढ़ डगर कठिन

जिले में रायगढ़ से घरघोड़ा मार्ग के बीच सबसे ज्यादा उद्योग है। इसके अलावा माइंस भी शामिल है। इस मार्ग में प्रतिदिन 2000 से अधिक भारी वाहन आवाजाही करती है। लेकिन खस्ताहाल सड़क होने की वजह से इन भारी वाहन व छोटे वाहन धारी का सफर काफी कठिन व जोखिम भरा हो गया। पीडब्ल्यूडी विभाग इन गढ्ढो में मिट्टी डालकर लीपापोती कर रही है लेकिन यह भी वाहनो की रेल मपेल की वजह से बेनतीजा रहा। और धूल को बढ़ा दिया है।

धूल से चंद मीटर तक देखना हुआ नामुमकिन

कोतरारोड रेलवे क्रासिंग व ढिमरापुर चौक तक मार्ग पूरी तरह से खस्ताहाल हो गया है। इस मार्ग में तीन माह पूर्व बीटी रोड का निर्माण कराया गया था। लेकिन अब यह उखड़ने लगा है जिससे धूल का गुब्बार व जानलेवा गढ्ढा बन गया है । धूल के गुब्बार से राहगीर वाहन चालकों को 3 मीटर तक कि दूरी को देख को देख पाना कठिन हो रहा है यही कारण लोगो के लिए दुर्घटना का सबब बन गया जो एक तरह से जान का दुश्मन बना हुआ है।

दमा अस्थमा एलर्जी जैसे बीमारी को मिल रहा बढ़ावा

धूल से सांस संबंधी बीमारी होने की संभवना होती है। धूल से लगातार सांस के मरीज बढ़ रहे हैं। धूल की एलर्जी से अस्थमा के मरीजों को ज्यादा परेशानी है। बधाों व अन्य लोग भी सर्दी जुकाम से पीड़ित हैं। धूल फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है। धूल के फेफड़े में जाने से दमघोंटू रोग होते हैं। दमा सहित अन्य रोग भी धूल से होते हैं। डाक्टर की माने तो इससे बचने के लिए मास्क या नाक पर रुमाल बाधना चाहिए। सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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