रायगढ़। नगर निगम रायगढ़ का दावा है कि शहर के हर घर से कचरा उठाया जा रहा है। हकीकत यह है कि कई मोहल्लों में रिक्शा भेजा ही नहीं जाता। टोटल हाउसहोल्ड और कचरा कलेक्शन के मकानों में अंतर है। दावा यह भी किया जाता है कि शहर में कोई डंपिंग प्वाइंट नहीं है। जबकि कई इलाकों में कचरा खुले में डंप किया जा रहा है।

कचरा कलेक्शन और निपटान में नगर निगम रायगढ़ फिसड्डी है। अभी तक कुल हाउसहोल्ड ही नहीं निकाला जा सका है। मतलब शहर में कितने मकान और दुकान हैं जिनसे कचरा कलेक्शन किया जाना है, यह नहीं पता। एनजीटी में दायर रिपोर्ट में छग सरकार ने दावा किया था कि एक भी निकाय में खुले में कचरा डंप नहीं होता और सभी का साइंटिफिक डिस्पोजल किया जाता है। धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग है। इतवारी बाजर में रोज कचरे का अंबार लगा रहता है।

निगम इस कचरे को उठाकर अमलीभौना और बड़े रामपुर डंपिंग प्वाइंट में ले जाता है। दीनदयाल पुरम, अतरमुड़ा, बाघ तालाब के पास समेत ऐसे कई जगह हैं जहां रोज कचरा डंप किया जाता है। यह गाइडलाइन का उल्लंघन है। रिपोर्ट में दिखाया जाता है कि शहर के हर घर से कचरा उठाया जा रहा है। जिन मोहल्लों में कचरा कलेक्शन नहीं होता, वहां के लोग खुले में कचरा डाल रहे हैं। इस पर कोई रोक ही नहीं है।

केंद्र तक नही पहुंचता है पूरा कचरा

शहर से एकत्रित पूरा कचरा मणिकंचन केंद्र में नहीं जाता। इसलिए खुले में कचरा डंप होता है। हर दिन कई ट्रैक्टर कचरा उठाकर अमलीभौना और बड़े रामपुर भेजा जाता है। यह नियम विरुद्ध है क्योंकि इससे कचरे का निपटान नहीं होता बल्कि लीगेसी वेस्ट बढ़ रहा है।

फिर अब डंप होने लगा कचरा

नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त आशुतोष पांडेय ने शहर को कचरा केंद्र फ्री करने ( फ्री गार्बेज सेंटर ) की कवायद की थी जहां शहर के भीतर व गली मोहल्ले में संचालित 400 कचरा डंप यार्ड को बंद करते हुए 96 में ला दिए थे। इसके अलावा उक्त डंप यार्ड में छोटे छोटे गार्डन बनाया गया थाइसमें आयुर्वेद से जुड़े पौधे के रोपण किया गया थ। लेकिन वर्तमान में उदासीन कार्यप्रणाली के चलते यह यहां गार्डन यानी गार्बेज केंद्र के इर्दगिर्द कचरा डंप हो रहा है यह स्थिति शहर के रिहायशी कालोनी व अन्य मोहल्ले में आम नजारा है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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