रायगढ़। धरमजयगढ़ के जंगलों में डेरा डाले हाथी का दल को लैलूंगा कया कमतरा मुख्य मार्ग में खरी पहाड़ के पास रोड पार करते देख दशहत में हैं। दरअसल, गजराजों का यह दल फटहामुड़ा और फुलीमुड़ा के 35 किसानों की खेतों में धावा बोलते हुए फसलों को चौपट कर चुका है। वहीं, दनौट से 19 हाथी पुसल्दा जा धमके वहां के लोगों ने वन विभाग से मदद की गुहार लगाए है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक धरमजयगढ़ के बाद अब लैलूंगा वन परिक्षेत्र में अतिकायों की धमक से वन अमला के कान खड़े हो गए हैं। बताया जाता है कि लैलूंगा रेंज में दल—बल के साथ पहुंचे हाथियों में आक्रामकता देखी गई है,इसलिए एहतियात के तौर पर उनका लोकेशन जानने के लिए वनकर्मी अलर्ट हैं वही बताया जा रहा है कि लैलूंगा के 25 किसानों एवं बोरो वन परिक्षेत्र के बताती रेंज के कई एकड़ खेत की फसलों को हाथियों के झुंड ने रौंद दिया। इसके अलावा गजराजों का यह दल रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल के आसपास ही भटक रहे हैं।

गुरुवार दोपहर कुछ लोग कार से लैलूंगा के जंगली इलाके से आवागमन कर रहे थे। तभी सामने उनको जो नजारा दिखा, उसे देख उन्होंने चुपचाप गाड़ी रोकने में ही भलाई समझी। हाथियों का झुंड खरी पहाड़ से उतरते हुए दनौट के मुख्य मार्ग पार करते हुए जंगल जा रहे थे। कार सवार युवकों ने इस दिलचस्प दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद करइंटरनेट मीडिया में प्रसारित भी किया। हाथी के इस दल में हथिनी और उसके बच्चे भी शामिल हैं, जो धूल उड़ाते हुए जंगलों में विचार रहे हैं।

अमलीडीह में मिला हथिनी का शव

बीते दिन घरघोड़ा के अमलीडीह सुमड़ा के जंगल में हथिनी की बरामद लाश इसी दल की होने की आशंका है। वहीं, दो दिनों के अंतराल में दो-दो हाथी की लाश मिलने से वन विभाग भी सकते में है। विभागीय जानकारी के मुताबिक हाथी मित्र दल और हाथी ट्रेकिंग दल लगातार जंगल में सर्चिंग कर रहे हैं, ताकि उनके उत्पात से लोग सावधान हो सके। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि वन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते ही वन्यजीव,वन्य संपदा एवं जनहानि बढ़ रही है।

आक्रामकता और जनहानी की नही कोई घटना

चार दिन के अंदर दो हाथी की लाश मिलने से विभाग में हलचल मच गया है वही हाथी की मौत के बाद इस दल के हाथियों के स्वभाव में भी आक्रामकता बढ़ने का आसार भी नजर आ रहा है। यही वजह है कि वन विभाग द्वारा अब ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कराई जा रही है कि वह जंगल की ओर न जाये । फिलहाल अब तक रायगढ़ व धरमजयगढ़ वन मंडल के किसी भी रेंज में पूर्व की भांति हाथियों द्वारा की जाने वाली उत्पात की घटना घटित नही हुई है ।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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