रायगढ़। शहर में एक जुलाई से प्लास्टिक को पूरी तरह से ना कहना का आदेश सख्त चेतावनी के साथ जारी की गई है। लेकिन अभी लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं। आलम यह है कि रोजाना बड़ी मात्रा में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। उत्पादन, भंडारण, वितरण, विक्रय और उपयोग पर रोक लग जाएगी।किंतु यह धरातल में नजर नही आ रहा है। जिसकी वजह से यह सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा घरों निकलकर ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैंड के इर्द गिर्द डंप हो रहा है। इसके निष्पादन व छटिंग के लिए करोड़ो की लागत से लगाई गई ट्रिचिंग प्रोसेस यूनिट भी बंद है। वहीं जिम्मेदार नगर निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

सिंगल यूज प्लास्टिक व अन्य उत्पाद इस्तेमाल को लेकर अभी भी पूरी तरह से काबू नही पाया गया है शहर का बाजार हो या घर हर तरफ़ आम नजारा है। बिक्री भी हो रही है और लोगो मे इसके डिमांड भी अधिक है जबकि कागज का उत्पाद इसके तुलना में महंगा व स्तरहीन, टिकाउहीन है। यही वजह है कि सब्जी-फल खरीदने वाले अमानक पालीथिन का ही उपयोग करते हैं। बहुत कम लोग थैला लाते हैं। किराना दुकान व दूसरी सामग्री की पैकिंग में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसे रोकने के लिए नगर निगम की जिम्मेदारी है किंतु वह सुस्त रवैये में कार्रवाई तो करती है लेकिन खानापूर्ति की तरह। इसके चलते नाली से लेकर बड़े नाला व कचरा डंपिंग क्षेत्र पूरी तरह से यह पालीथिन से पटने लगा है।जिसके बदबू से आमजन व राहगीर परेशान है। यह स्थिति निगम की कार्रवाई व केंद्र के आदेश की पोल को खोलकर रख दिया है।

नियंत्रण सर्वे में औसत प्रति व्यक्ति के पीछे 18 ग्राम कचरा

प्रदूषण नियंत्रण सर्वे के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में डेढ़ हजार क्विंटल प्रतिदिन कचरा निकलता हैं। इसमे से केवल 60 फीसद ही एकत्रित हो पाता है। बाकी 40 फीसद नाली नाला व अन्य स्थानो में पड़ा रहता है। वही साल भर में 30 लाख क्विंटल सिंगल यूज प्लास्टिक निकलता है । इस लिहाज से आकड़ो में 18 ग्राम प्रति व्यक्ति यह कचरा पैदा करता हैं। जो पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदेह है।

सामूहिक कार्यक्रम में होता है बेतहाशा उपयोग

शादी-विवाह हो या अन्य कायक्रम, सभी में सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोग होता है। प्लास्टिक से बने गिलास, कप, कटोरी, चम्मच के बिना कार्यक्रम नहीं होते। थर्माकोल के दोने, प्लेट और कप का भी उपयोग होता है। इनका इस्तेमाल केवल एक बार होता है। इनकी रिसाइकिलिंग भी कठिन होती है। इसलिए ये पर्यावरण को भी हानि पहुंचाते हैं।

बिक्री करने वाले पर कार्रवाई बनाने वाले को छूट

नगर निगम शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगते ही जागरुकता अभियान व सतत कार्रवाई कर रहा है लेकिन यह भी खानापूर्ति की तरह है जहां दुकानदारो के उपर कार्रवाई तो हो रहा है किंतु निर्माणकर्ता पर नदारद है।हालांकि सिंगल यूज प्लास्टिक के विक्रेताओं से लेकर बनाने कंपनी द्वारा अपना स्टाक कम कर दिया है, लेकिन कई सामग्री में इसका इस्तेमाल अब भी हो रहा है।

प्लास्टिक को लेकर उठाए गए कदम

इस साल की शुरुआत में दुनिया के 124 देशों ने यूनाइटेड नेशनल एनवायरमेंट असेंबली में एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें भारत का भी नाम शामिल था। इस प्रस्ताव के मुताबिक हस्ताक्षर करने वाले देशों को भविष्य में प्लास्टिक के उत्पादन से लेकर उसके निस्तारण करने तक के लिए कानूनी प्रक्रिया बनाने पर जोर देना था, जिससे दुनिया में प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। 2002 में बांग्लादेश प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने वाले दुनिया का पहला देश बना था। जुलाई 2019 में न्यूजीलैंड ने भी प्लास्टिक पर बैन लगा दिया था। वहीं चीन 2020 के बाद से चरणबद्ध तरीके से प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा रहा है। जुलाई 2019 के आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 68 देश प्लास्टिक की पालीथिन पर बैन लगा चुके हैं।

प्लास्टिक पर प्रतिबंध इसलिए है जरूरी

प्लास्टिक को दुनिया में होने वाले प्रदूषण के लिए एक बड़ा कारक माना गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018- 19 में पूरे देश में 30.59 लाख टन और वित्त वर्ष 2019-20 में 34 लाख टन से अधिक प्लास्टिक का कचरा निकला था। प्लास्टिक के कचरे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका निस्तारण करना बेहद मुश्किल होता है। कई शोधों से पता चला है कि सिंगल यूज प्लास्टिक के के कारण निकलने वाले कचरे के एक बड़े हिस्से का निस्तारण नहीं हो पाता है, जिसके कारण ये देश के विभिन्ना हिस्सों के कूड़ा घरों में एकत्रित होकर हवा, पानी और जमीन तीनों को दूषित करता है।

शासन व एनजीटी के निर्देश पर कार्य किया जा रहा है लगातार कार्रवाई भी हो रहा है। ट्रिचिंग प्लांट मशीन का ठेका हुआ था , ठेकेदार काम ही नहीं किया अब दोबारा ठेका निकालने की तैयारी की जा रही है। लोगो को भी स्वच्छ व सुंदर शहर बनाने के लिए सहयोग व जागरूक होना पड़ेगा तब इसका प्रभावी असर पड़ेगा।

संजय देवांगन, एमआइसी प्रभारी

Posted By: Yogeshwar Sharma

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