धरमजयगढ़, रायगढ़ । धरमजयगढ़ का ऐसा गांव जहां हर घर में व्यक्ति कुबड़ेपन का शिकार है। बूढ़े, बच्चे, जवान सभी के दांत काले हो रहे हैं। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि क्या रहा है । कुछ लोग इसे भूत-प्रेत का प्रकोप मान रहे हैं तो कुछ दूषित पानी को वजह बता रहे है। केराकोना ग्राम धरमजयगढ़ से चन्द किलोमीटर की दूरी पर मांड नदी के तट पर बसा हुआ है। जहां आदिवासी समुदाय के 10 परिवार के लोग निवासरत है, जिसमें लगभग सभी घरों में एक से दो लोग इस भयंकर कुबड़ेपन बीमारी के शिकार है।

वहीं कुछ लोग तो घसीट-घसीट कर जीवन काट रहे हैं। इस दयनीय जीवन के पीछे गांववासी भूत-प्रेत का काला साया गांव में पड़ने को मानने लगे है। बीमारी से छुटकारा पाने बैगा से झाड़- फूंक के साथ साथ डॉक्टरी इलाज कराकर थक चुके है, लेकिन डॉक्टरों को कुछ समझ नहीं आ रहा है।

गांव के लोग सोच रहें हैं आखिर गांव में इस बीमारी का प्रकोप कैसे पड़ गया है। पीड़ित ग्रामीण देवमति, बलिंदरबाई, सुनीता, आसमोती बाई, सोनामती,लीलावती, पेनियासो, सोनसाय, रंजीत राठिया के चेहरे पर चिंता की गंभीर लकीरे इस बीमारी की भयावहपन को बताने के लिए काफी है।

कुल मिलाकर उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। यह बताना आवश्यक है कि इस कुबड़ेपन की बीमारी से घबराकर कुछ लोग गांव से अन्यत्र पलायन कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर संबंधित विभाग और प्रशासन को इस संवेदनशील मामले पर कोई लेना देना ही नहीं है।

अगर बात करें पीएचई विभाग की तो उन्हें जानकारी तक नहीं है कि केराकोना ग्राम में कितने बोरिंग और उनकी क्या दशा है। गांव वाले जिस बोरिंग का पानी पी रहे हैं वो दूषित और बदबूदार हैं और कोई उनके लिए दूसरा विकल्प भी नहीं है।

दूसरी तरफ स्वास्थ्य शिविर कभी कभी लगाकर स्वास्थ्य विभाग महज खाना पूर्ति करते हैं। ऐसे स्थिति में ग्रामीणों के पास अपनी इस गंभीर समस्या से निजात पाने कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।

- पानी में एक विशेष तत्व फ्लोराइड की अधिकता से दांतों में कालापन, पीलापन, कमर दर्द, कुबड़ेपन की बीमारी होती है। लंबे समय तक इस तरह के दूषित जल के प्रयोग से इस प्रकार के लक्षण देखे जाते हैं। समय रहते बीमारी की रोकथाम नहीं होने से स्पाइनल कार्ड में नसों में दबाव कमजोरी व पैरालिसिस की गंभीर समस्या हो सकती है। डॉक्टर ने कहा अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर केराकोना में स्वास्थ कैंप लगवाने की बात कही है। - डॉ खुर्शीद खान, सेक्टर प्रभारी