रायगढ़। तीन दिन पहले वन विभाग ने एक नया कारनामा करते हुए बोईरदादर बीट वन परिक्षेत्र में एक मृत चीतल के शव को जंगली जानवर तेंदुए के लिए भोजन स्वरूप पेड़ में टांग दिए थे। जिससे न तो मृत चीतल का विभागीय नियमानुसार उसका दाह संस्कार हुआ और न ही वह जंगली जानवर का पेट भर पाया। क्योंकि इस परिक्षेत्र में 6 वर्षो से तेंदुए की आमदरफ्त नही हुई थी।

ऐसे में बैगेर पुष्टि चीतल के शव को टांगना एक तरह से लापरवाही को दर्शाया था अब यह मामला तूल पकड़ लिया है। जिसमें वन्यजीव प्रेमी व अन्य लोगो ने इस पर मोर्चा खोलते हुए वन मंत्री व उधा अधिकारियों को कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किये है। गौरतलब है कि बोईरदादर बीट में एक चीतल की मौत कुत्तों के काटने से हो गई थी, लेकिन उनके शव को जलाने के बजाए रायगढ़ रेंजर अन्य वनकर्मियों के साथ उसे बंगुरसिया के जंगल कक्ष क्रमांक 915 में एक पेड़ पर बंधवा कर वापस आ गए।

इस बात की भी पुष्टि नहीं की गई कि यहां उसे खाने के लिए ना तो कोई तेंदुआ है और न ही कोई अन्य हिसंक वन्यप्राणी है। उसकी निगरानी में भी लापरवाही बरती गई।सिर्फ सुबह शाम देखने के लिए कह दिया गया। ऐसी लापरवाही पर अब वन्यप्राणी प्रेमियों के बीच काफी आक्रोश देखा जा रहा है और इस लापरवाही को लेकर पर्यावरण व वन्यप्राणी प्रेमियों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों ने वन व वन्यप्राणियों को लेकर अच्छा मजाक बना रखा है और आने वाले समय में वनमंत्री सहित उधा स्तर पर शिकायत करने का मन बना लिया है। उनका यह भी कहना है कि जब चार दिनों से बंगुरसिया के जंगल में मृत चीतल बंधा हुआ था और यहां उसे खाने के लिए कोई अन्य हिसंक वन्यप्राणियों का प्रमाण नहीं मिला, तो विभाग के अन्य अधिकारी इस पर आखिर कार्रवाई करने या फिर मार्गदर्शन देने में पीछे क्यों रहे।

इससे उनकी लापरवाही भी जग जाहिर हो रही हैआखिरकार चीतल का शव बंधे बंधे सड़ गया। हांलाकि अब इस मामले में उधा स्तर पर शिकायत करते हुए समस्त दोषी अधिकारियों को निलंबित करने की मांग किए जाने की बात वन व वन्यप्राणी प्रेमी कर रहे हैं।

पिछले कई सालों से तेंदुआ का कोई प्रमाण बंगुरसिया के जंगलो में नहीं मिला है। जरूर हाथी की मौजूदगी रहती है, पर इस तरह यहां मृत चीतल को एक पेड़ से बांध कर आ जाना अपराण की श्रेणी में आता है और इसके लिए वनमंत्री से लेकर उधा स्तर पर शिकायत कर समस्त दोषी वन विभाग के अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की जाएगी।

गोपाल अग्रवाल, वन्यप्राणी प्रेमी व सदस्य जोनल रेलवे बोर्ड सलाहकार, रायगढ़

सरकार की जो नितिया है वह सही है उन नितियों का जमीनी स्तर पर व्यपाक पैमाने पर दुरुपयोग किया जाता है। जिसका यह जीता जागता उदाहरण है। रायगढ़ वन मंडल में वन्यप्राणियों की सुरक्षा पूर्ण रूप से नहीं की जाती है और आए दिन वन्यप्राणी मर रहे हैं। जंगल में खाना, पानी की व्यवस्था नहीं होती है तो वे गांव की ओर आते हैं और कई दफे हाथी व भालू से से जनहानि भी होती है। वहीं वन्यप्राणियों की भी हानियां होती है। रायगढ़ वन परिक्षेत्र में बड़ी लापरवाही हुई है और लाकडाउन खुलने के बाद इस मामले की उधा स्तर पर शिकायत की जाएगी। राजेश त्रिपाठी, पर्यावरण प्रेमी व समाजिक कार्यकता, रायगढ़।

मृत चीतल को ऐसे जंगल में छोड़ना जहां तेंदुआ व मांसाहारी वन्यप्राणी नहीं हैं वह पूरी तरह गलत है। रायगढ़ के वन कर्मचारियों ने जो किया वो बड़ी लापरवाही है और निर्देशों का सही तरह से पालन नहीं हुआ है। इससे और बड़ी घटना घट सकती थी जैसे चीतल के सींग की चोरी होना, उसमें कोई जहर मिलाना। मांसाहारी वन्यप्राणी चीतल के शव को पूर्णता नहीं खा ले तब तक उसे निगरानी में रखना चाहिए।

-पीएस पटेल, सेवानिवृत एसडीओ, वन विभाग

Posted By: Nai Dunia News Network

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