रायगढ़। नाबालिंग लड़की को शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण के दोषी ढ़ाबा वाले को अदालत ने सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला छाल थाना क्षेत्र का है। बाल्को कोरबा निवासी विकास उर्फ वि-ी खेड़ा पाली में ढ़ाबा चलाता था। वह अक्सर वहां आना जाना करता था। यहां उसकी पहचान एक बालिका से हुई। दोनों मोबाइल पर लंबी- लंबी बातचीत किया करते थे।

कालांतर में विकास ने बालिका से प्रेम का इजहार करते हुए शादी का वायदा किया। एक अप्रैल 16 को विकास ने फोन किया कि वह उसे लेने गांव आ रहा हैं, जस पर बालिका तैयार होकर उसके बताये स्थान के लिए घर से निकल गई। इसके बाद बालिका को मोटर साइकिल में लेकर विकास रायगढ़ आ गया।

यहां एक कमरा में उसे रखा और शारीरीक संबध बनाया। छह दिन तक रायगढ़ में रहने के बाद दोनों बोतली -कोरबा चले गए। यहां विकास अपनी बुआ के घर में रुका । यहां भी उसने बालिका से शारीरीक संबंध बनाया। 16 दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा।

इसके बाद विकास बालिका को मोटर साइकल से ग्राम जोबी में छोड़कर भाग गया। इधर बालिका के पिता ने चार अप्रेल 16 को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बालिका के गांव वापस आने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और दुष्कर्म के मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने भादवि की धारा 363, 366, 376 और पाक्सो एक्ट व अत्याचार अधिनियम की धारा 3 (2) (प) के तहत अपराध दर्ज कर मामला अदालत में पेश किया।

यहां विशेष न्यायाधीश विजय कुमार होता ने दोष सिध्द पाया और विकास को दुष्कर्म व बालको के लैगिंक अपराध के आरोप में सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा दी। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी। मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एके श्रीवास्तव ने पैरवी की ।