मोरगारायगढ़, नईदुनिया न्यूज। यह बात तय कि नेटवर्क सुविधा तलाशने के लिए आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आसपास भटकना पड़ता है। कभी पेड़ों का सहारा तो कभी टीले के ऊपर जाकर टावर की सुविधा लेनी पड़ती है। जिले के अंतिम छोर से लगा ग्राम पंचायत मोरगा आज भी बड़े अविकसित गांव में शामिल है।

कोरबा और अंबिकापुर के बीच यह ऐसा गांव है, जहां आसपास के दर्जनों गांव निर्भर हैं। ग्रामीणों के लिए तात्कालिक संपर्क सुविधा मोबाइल कारगर साबित नहीं हो रहा। मामला केवल संपर्क का ही नहीं बल्कि सरकारी कार्यालयों से जुड़े कार्यों का संपादित नहीं होने का भी है। नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़ने के 50 किलोमीटर दूरी तय कर पोड़ी-उपरोड़ा आना पड़ता है।

नेटवर्क सुविधा नहीं होने के कारण जिले के दर्जनों वनांचल गांव आज भी सूचना संचार की सुविधाओं से वंचित है। जनपद के सरकारी दफ्तरों से लेकर ग्राम पंचायतों के लोक सेवा केंद्रों में नेटवर्क सुविधा देने में बीएसएनएल नाकाम साबित हुआ है। निजी कंपनियों ने मोरगा समेत अन्य सुदूर अंचलों में टावर तो लगाया है, किंतु कनेक्टिविटी सुविधा शुरू नहीं होने के कारण लोगों खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी उचित मूल्य दुकानों को कोर पीडीएस सिस्टम से इस वजह से जोड़ा जाना संभव नहीं, क्योंकि आसपास क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है।

इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग से संचालित योजनाओं में पोषण आहार, बच्चों का वजन आदि की अपडेट जानकारी परियोजना से जिला कार्यालय भेजनी हो तो तत्काल सुविधा नहीं मिल पाती है। सबसे बड़ी पोड़ी-उपरोड़ा ऐसा ब्लॉक है जहां बैकिंग सुविधा तो है, लेकिन आज भी एटीएम की सुविधा नहीं है। नेटवर्क एरिया में आने के लिए लोगों को मोरगा से 50 किलोमीटर दूर पोड़ी-उपरोड़ा आना पड़ता है।

यह दशा केवल पोड़ी-उपरोड़ा ही नहीं बल्कि कोरबा ब्लॉक के सतरेंगा, अजगरबहार क्षेत्र से लगे गांवों की भी है। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के गांव कनेक्टिविटी के मामले में पिछड़े होने के कारण अविकसित ब्लॉक से अब तक उबर नहीं पाया है। नियुक्ति के बाद कई कर्मचारी केवल नेटवर्क सुविधा अभाव के कारण क्षेत्र से जल्द ही अपना तबादला कराने के फेर में रहते हैं। बार-बार अधिकारियों के फेरबदल के कारण प्रशासन के विकासमूलक काम ठप हैं।

इमर्जेंसी में 108 डायल करना व्यर्थ

नेटवर्क की सुविधा नहीं होने के कारण संजीवनी अथवा महतारी 112 को डायल करना व्यर्थ है। भले ही शासन की ओर से संस्थागत प्रसव के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है, किंतु नेटवर्क विहीन गांवों में आज भी प्रसव परंपरागत तरीके से गांव की दाई के भरोसे ही होता है। सड़क दुर्घटना की स्थिति में त्वरित उपचार के लिए सरकारी वाहन से संपर्क नहीं होने के कारण पीड़ित की जान बचाया जाना संभव नहीं होता।

फेल ल हो चुके हैं स्कूलों के टैबलेट सिस्टम

नेटवर्क नहीं होने के कारण स्कूलों में बांटे गए टैबलेट सिस्टम बेकार साबित हो रहे हैं। शिक्षा की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाई की ऑनलाइन जानकारी के लिए सिस्टम दिया गया था। नेटवर्क की सुविधा नहीं होने से टैबलेट की खरीदी सरकारी धन का अपव्यय साबित हुआ है। शिक्षक पहले टैबलेट को लेकर नेटवर्क के दायरे में आकर अपडेट कर लेते थे, किंतु प्रतिदिन नेटवर्क एरिया में जाने की समस्या के कारण अधिकांश लोगों ने इसका उपयोग बंद कर दिया है।

पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के अधिकांश गांवों में नेटवर्क की समस्या की समस्या है। शासन की ओर सूचना संचार सुविधा को सशक्त करने के लिए लगातार पहल की जा रही है। कनेक्टिीविटी सुविधा के संबंध बीएसएनएल से चर्चा की जाएगी। - अरुण खलखो, एसडीएम पोड़ी-उपरोड़ा

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