जशपुरनगर । Raigarh News: श्रम विभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना में लाखों का बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। मजदूरों को प्रशिक्षित कर,रोजगार देने के आड़ में विभाग के अधिकारियों ने हितग्राहियों को दी जाने वाली राशि को अपने बैंक खाते में जमा करा लिया। इतना ही नहीं,मामला उजागर होने के बाद,जांच में गड़बडी पुष्टि होने के बावजूद श्रम विभाग के अधिकारियों ने मामले का रफा दफा कर दिया।

इस पूरे मामले में विभाग के आला अधिकारियों के साथ,राजनीतिक संरक्षण की बात भी सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक श्रम विभाग के अंर्तगत छग भवन सन्निानिर्माण कर्मकार मंडल में प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 2017 में पंजीकृत श्रमिकों को प्रशिक्षण देने की यह योजना शुरू की थी। योजना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्लेसमेंट एजेंसी काल मी सर्विसेस के माध्यम से कम्प्यूटर आपरेटर से लेकर कल्याण अधिकारी पद पर जिले में भर्ती की गई थी।

योजना के तहत 200 श्रमिकों को राजमिस्त्री और इलेक्ट्रेशियन का प्रशिक्षण देने के लिए विभाग ने 5 दिसंबर 2017 को छत्तीसगढ़ अभिनंदन एजुकेशनल एंड सोशल वेलकेयर सोसायटी को दिया गया था। कार्य आदेश जारी होने के साथ ही विभाग में भारी भ्रष्टाचार का खेल शुरू हो गया। शासन द्वारा निर्धारित नियम व मापदंड को दरकिनार कर अपात्र हितग्राहियों का चयन किया गया।

इन चयनित अपात्र हितग्राहियों के सूची पर बतौर भवन एवं सन्निानिर्माण कर्मकार मंडल के निरीक्षक का हस्ताक्षर विभाग के कल्याण अधिकारी ने कर दिया। जबकि प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किए गए कल्याण अधिकारी को श्रम विभाग ने वित्तिय,वैधानिक और विभागीय अधिकार नहीं दिया गया है। इस पूरे मामले में असली खेल प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद शुरू हुआ।

प्रशिक्षण के लिए चयनित हितग्राहियों को 7 लाख 11 सौ रूपए का भुगतान किया जाना था। इनमें से 60 हितग्राहियों के नाम की सूची,बैंक खाता के विवरण के साथ कल्याण अधिकारी रमेश यादव ने तैयार कर श्रम पदाधिकारी के समक्ष 20 अप्रैल 2018 को प्रस्तुत किया था। इसी दिनांक को श्रम विभाग ने आरटीजीएस के माध्यम से 7 लाख 11 सौ रूपए हितग्राहियों के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।

मामले ने उस वक्त नया मोड़ लिया जब विभाग को कल्याण अधिकारी रमेश यादव द्वारा हितग्राहियों के बैंक खाते की जगह,अपनी पत्नी और स्वजनों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने की जानकारी मिली। श्रम विभाग में हुए मानदेय घोटाले के इस मामले की जानकारी मिलने के बाद भी अधिकारियों ने ना तो किसी प्रकार की जांच की कार्रवाई की और ना ही कल्याण अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।

मामले के संबंध में जब नईदुनिया ने श्रमपदाधिकारी आजाद सिंह पात्रे से चर्चा की गई तो उन्होनें इस पूरे मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार करते हुए,सिर्फ इतना बताया कि कल्याण अधिकारी रमेश यादव को मामला उजागर होने के बाद हटा दिया गया था।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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