रायगढ़। शिक्षा सत्र शुरू होने के पांच महीने बाद जाकर अब एकलव्य आदिवासी विद्यालय में शिक्षक पढ़ाने आएंगे। आजाक विभाग ने आधा सत्र गुजर जाने के बाद अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है और शनिवार को इसके लिए आवेदनों की स्क्रूटनी कर उम्मीदवारों से दावा आपत्ति मंगाई गई है। जिले में संचालित एकलव्य आवासीय विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था के लिए प्रशासन ने सुध ले ली है। खरसिया के मुड़पार एवं धरमजयगढ़ के बायसी कालोनी में संचालित आवासीय विद्यालय के लिए अतिथि शिक्षकों के कुल 270 आवेदन ही मिले हैं। खरसिया में 4 व धरमजयगढ में 2 अतिथि शिक्षकों के लिए आए इन आवेदनों में शनिवार को जिला स्तरीय समिति ने विचार किया और इसकी स्क्रूटनी करने के बाद योग्य उम्मीदवारों का चयन करने से पहले दावा आपत्ति मंगाई है।

दावा आपत्ति के बाद मेरिट सूची निकालकर फिर अतिथि शिक्षकों का चयन किया जाएगा। इसलिए इसमें महीने के अंत तक ही शिक्षक संबंधित स्कूल में पहुंच सकेंगे। उल्लेखनीय है कि जिले के इन दोनों एकलव्य आदिवासी स्कूल में अब तक शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई थी।

शासन के निर्देश पर आजाक विभाग बीते साल भर से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया अपना रहा था लेकिन राज्य में सरकार बदलते ही इस प्रक्रिया को टाल दिया था और इस सत्र में अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था करने कहा था। सरकार के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन ने अतिथि शिक्षकों के लिए समय पर विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की, जिससे अब तक इन स्कूलों में शिक्षकों का इंतजार चल रहा है।

कैसे होगा गुणवत्ता सुधार

सरकारी स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन ने कई तरह के दिशानिर्देश दे रखे हैं लेकिन आदिवासी बाहुल्य वाले इलाके में शिक्षकों की ही भर्ती में ही प्रशासन ने 5 महीने गुजार दिए। अतिथि शिक्षकों की भी जो भर्ती प्रक्रिया चल रही है। उसके अनुसार अगले महीने से पहले इनके स्कूलों में पहुंचने की संभावना कम ही नजर आ रही है। वहीं पढ़ाई नहीं हो पाने से अब इन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को कोर्स पूरा नहीं हो पाने की भी चिंता सता रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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